बुलंदशहर पुलिस का दावा निकला खोखला

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बुलंदशहर पुलिस के दावे पर एसटीएफ और जांच एजेंसियां एकमत होती नहीं दिख रही हैं। बुलंदशहर हिंसा में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के आरोप में पकड़े गए फौजी जितेंद्र कुमार उर्फ़ जीतू पर संशय बना हुआ है। जहां बुलंदशहर पुलिस ने दावा किया है कि यह हत्या जीतू ने ही की है वहीं एसटीएफ को संशय है कि जीतू ने ही सुबोध पर गोली चलाई है। एसटीएफ को कोई पुख्ता सबूत न मिलने की वजह से यह संशय है। उधर, सेना ने भी जम्मू में पूछताछ की और यही बात सामने आई।

दरअसल, इस मामले की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है। फौजी जीतू को बुलंदशहर पुलिस ने जम्मू से इस बात के आधार पर पकड़ा कि उसने ही सुबोध कुमार को गोली मारी। बुलंदशहर पुलिस के इस दावे को नकारते हुए जांच एजेंसियों ने कहा कि फिलहाल इस बात का कोई पुख्ता सबूत न मिलने के कारण इस बात पर संशय बना हुआ है।

एसआईटी और एसटीएफ के अधिकारियों ने जीतू से 5 घंटे तक पूछताछ की और उपलब्ध करवाए गए सभी वीडियो और साक्ष्यों को भी काफी बारीकी से परखा। तमाम वीडियो को देखने के बाद एसटीएफ ने दो महत्वपूर्ण वीडियो को अपने पास रखा और उन्हें तकरीबन 50 से अधिक बार देखा। इसके बाद उन वीडियो को फोरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा गया है।

जांच की गई सारी फुटेज से यह सामने आया कि जीतू प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद था और इस बात को जीतू ने भी कबूल किया है। पूछताछ के दौरान जीतू ने बताया कि प्रदर्शन में सारे गांव वालों के साथ वह भी मौजूद था, लेकिन उसने गोली नहीं चलाई। वहीं जीतू को गोली चलाने वाला एक फुटेज भी दिखाया गया, जिसमें एक शख्स गोली चला रहा है। जीतू ने इस फुटेज में किसी दूसरे युवक के होने की बात कही। जम्मू में सेना द्वारा की गई पूछताछ में भी जीतू द्वारा गोली न चलाए जाने की बात सामने आई है। अब बुलंदशहर पुलिस खुद ही सवालों के कटघरे में आ गई है और उसका दावा खोखला साबित हुआ।

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