महिलाओं ने इस क्षेत्र में कदम रख दिखाया दम

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प्राचीनकाल से लेकर आज के दिन तक भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं| आज बहुत कम ऐसे क्षेत्र हैं, जहां महिलाओं की उपस्थिति नहीं है | लगभग हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। अब महिलाओं ने एक और क्षेत्र में कदम रखकर अपना दम दुनिया को दिखाया (Women Commandos Use In Full Fledged Operation) है| साथ ही उन्होंने यह कार्य कर साबित कर दिखाया है कि नारी के लिए कुछ भी असंभव नहीं है |

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छत्तीसगढ़ के बस्तर और दंतेवाड़ा के नक्सल प्रभावित इलाकों में पहली बार एंटी नक्सल कमांडो की यूनिट के तहत 30 महिलाओं को तैनात किया गया (Women Commandos Use In Full Fledged Operation) है। इस यूनिट को ‘दंतेश्वरी फाइटर’ के नाम से जाना जाता है। हाल ही में पहली बार छत्तीसगढ़ पुलिस ने महिला कमांडो को डिस्ट्रिक्टर रिजर्व गार्ड के रूप में नक्सलियों के खिलाफ फ्रंटलाइन फोर्स के तौर पर नियुक्त किया था। इस यूनिट में 30 महिलाएं शामिल हैं, जिसकी अगुवाई डेप्युटी सुप्रिटेंडेंट ऑफ पुलिस दिनेश्वरी नंद कर रही हैं।

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दंतेश्वरी फाइटर्स और पुलिस की टीम दोनों को ही जंगल में नक्सलियों से लड़ने के लिए कड़ी ट्रेनिंग दी गई है। इन लोगों को नक्सलियों के खिलाफ लड़ने का अच्छा अनुभव है और ये लोग क्षेत्र से काफी तरह से वाकिफ हैं। 30 महिला कमांडो हाल ही में अपनी ट्रेनिंग पूरी करके लौटी हैं। इससे पहले इन लोगों को बस्तर के जंगलों में माओवादियों से लड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया गया था। बता दें कि ऐसा पहली बार है, जब महिला डीआरजी टीम को दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव की अगुवाई में नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है। इससे पहले दंतेवाड़ा में पांच पुरुषों की टीम को ही तैनात किया गया था।

एक वर्ष पहले बस्तर में सीआरपीएफ ने भी इसी तरह की अलग टीम बनाई थी, जिसे क्षेत्र में नक्सलियों से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इन लोगों को बस्तरिया बटालियन के नाम से जाना जाता था, जिसमें कई युवा लड़के और लड़कियां शामिल हुई थीं। इन लोगों की ट्रेनिंग पहले ही पूरी हो चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि बस्तरिया बटालियन टीम ने ही 30 सदस्यीय दंतेश्वरी फाइटर्स का चयन किया था।

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30 सदस्यीय दंतेश्वरी फाइटर्स को ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी डीएसपी दिनेश्वरी नंद को दी गई थी। इस यूनिट में पांच ऐसी महिलाएं भी हैं, जो पहले नक्सली थीं, लेकिन बाद में उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। इन महिला कमांडो को बाइक चलाने की ट्रेनिंग के साथ ही हाईटेक तकनीक का भी इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी गई है। साथ ही इन्हें आधुनिक हथियार चलाने की भी ट्रेनिंग दी गई है।

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