यूपी सरकार का आरोप

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अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने है, लेकिन दशकों से चल रहे इस विवाद में अब उत्तरप्रदेश की योगी सरकार नयी दलीलों के साथ कोर्ट पहुंची है| अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मुस्लिम पक्षकार राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के मामले को टालने की कोशिश कर रहा है| सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने दलील दी कि जिस मुद्दे को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में तरजीह नहीं दी उसे सुप्रीम कोर्ट में बेवजह तूल दिया जा रहा है|

यूपी सरकार ने कहा कि 1994 में इस्माइल फारुखी मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला दिया था| जिसमें पैरा 82 में लिखा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है| सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच को जब अयोध्या का मूल विवाद सुनना था तो बात फैसले के इसी पैरा पर अटकी और तय हुआ कि पहले सुनवाई इस  पर ही हो| लिहाजा अदालत ये तय करेगी कि इस्माइल फारुखी वाले मामले के फैसले पर फिर से विचार करने की जरूरत है या नहीं| इस बेंच का फैसला अगर हां में होगा तो सात या उससे ज्यादा जजों की संविधान पीठ बनेगी और वह फैसला करेगी| फैसला अगर नहीं में आया तो फिर मूल भूमि विवाद पर बहस होगी|

लोकसभा चुनाव से पूर्व यूपी सरकार की ये दलील एक ओर जहां यह दिखा रही है कि राम मंदिर बनाने के बल पर चुनाव लड़ने वाली सरकार, अयोध्या मसले का बिल मुस्लिमों पर फाड़ रही है| वहीं यह भी बोलना गलत नहीं होगा कि यह दलील देकर सरकार एक बार फिर शायद राम मंदिर के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ने की तैयारी में है|

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