कुलदीप सेंगर की सदस्यता रद्द, बांगरमऊ विधानसभा सीट खाली

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उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित उन्नाव रेप केस (Unnao Rape Case) के आरोपी और भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janata Party) के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar Assembly Membership Cancelled) की आज विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। सदस्यता रद्द हो जाने के बाद अब कुलदीप सेंगर विधायक नहीं रहे। गौरतलब है कि कुलदीप की सदस्यता रद्द की जाने की सूचना प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप कुमार दुबे ने दी और इस बाबत उन्होंने एक अधिसूचना जारी की है। प्रदीप कुमार दुबे (Pradeep Kumar Dubey) द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार दोषी कुलदीप की विधानसभा सदस्यता उसी दिन से ख़त्म मानी जाएगी जिस दिन सजा का ऐलान किया गया था। गौरतलब है कि कुलदीप सेंगर (BJP Kuldeep Singh Sengar)  को बीते साल दिसंबर माह में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। राजधानी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 20 दिसंबर 2019 को भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar Assembly Membership Cancelled) को दोपहर 2 बजे सजा सुनाई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में सेंगर को उम्र कैद की सजा सुनाई साथ ही उन पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।

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विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार कुलदीप सेंगर (Kuldeep Singh Sengar Assembly Membership Cancelled) की सदस्यता रद्द किए जाने के बाद 20 दिसंबर 2019 से उत्तर प्रदेश की बांगरमऊ विधानसभा सीट रिक्त हो गई है। उन्नाव जिले की बांगरमऊ विधानसभा सीट से कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) चुनाव जीते और विधायक बने थे। गौरतलब है कि उनकी सदस्यता को चुनाव आयोग द्वारा रद्द कर दिया गया है जबकि भारतीय जनता पार्टी उन्हें पहले ही अपनी पार्टी से बाहर कर चुकी है। गौरतलब है कि उनकी सदस्यता सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के तहत रद्द की गई है। साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने एक फैसले में आदेश जारी किया था कि यदि कोई विधायक, सांसद या विधान परिषद सदस्य किसी भी तरह के अपराध में लिप्त पाया जाता है और उस पर दोष सिद्ध होने के बाद उसे कम से कम दो साल या उससे अधिक की सजा होती है तो वह आयोग्य माना जाएगा और वह जनप्रतिनिधि नहीं रह जाएगा। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  के इसी आदेश के तहत सेंगर को सजा सुनाए जाने के बाद से उनकी सदस्यता को रद्द माना जाएगा।

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क्या है उन्नाव रेप मामला?

गौरतलब है कि उन्नाव के बांगरमऊ से भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर (BJP MLA Kuldeep Sengar) के घर 4 जून 2017 को उनके घर के करीब रहने वाली एक महिला एक 17 वर्षीय किशोरी को लेकर पहुंची। वह विधायक सेंगर (Kuldeep Singh Sengar Assembly Membership Cancelled) से नौकरी मांगने के लिए पहुंची थी। किशोरी को विधायक के घर ले जाने वाली महिला का नाम शशि सिंह (Shashi Singh)   बताया गया था और जानकारी मिली थी कि वह सेंगर की बेहद करीबी है। हालांकि इस मुलाक़ात के कुछ दिनों बाद ही किशोरी ने सेंगर पर बलात्कार (Kuldeep Singh Sengar Rapist) का आरोप लगाया जिसके बाद किशोरी और उसका परिवार थाने के चक्कर काटते रहे, अधिकारियों से मदद की और इंसाफ की गुहार लगाते रहे लेकिन उनकी कोई भी सुनवाई नहीं हुई। जब हर तरफ से वे हार गए तब उन्होंने अदालत का रुख किया और फिर थाने में उनकी FIR दर्ज की गई। इसके बाद शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम। सेंगर ने पीड़िता और उसके परिवार पर केस वापस लेने का दबाव बनाया, उन्हें डराया धमकाया लेकिन तब तक मामला मीडिया तक पहुंच गया और सेंगर के मंसूबों पर पानी फिर गया। यह मामला काफी गरमागया जिसके तहत 2018 में इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई लेकिन जनता का आक्रोश दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था इसलिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने खुद इस मामले में संज्ञान लिया और आरोपी सेंगर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 1 हफ्ते की न्यायिक हिरासत के बाद सीबीआई (CBI) ने अपनी जांच पूरी कर पीड़िता के साथ हुए बलात्कार की पुष्टि कर दी और सेंगर पर आरोप सिद्ध (Unnao Rape Case Convict) हो गया। इसके बाद भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण की 4 धाराओं के तहत सेंगर पर मामला दर्ज किया गया। 20 दिसंबर 2019 को सेंगर को सजा सुनाई गई।

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Prabhat Jain

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