महिला कर्मचारी ने धरने में मुंडवाया सिर

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बेरोज़गारी एक ऐसा मुद्दा है, जिसको लेकर सरकार दावे तो बहुत करती है, लेकिन हकीक़त में रोज़गार की तंगी हर राज्य में देखी जा सकती है| छत्तीसगढ़ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि सरकार जनता की समस्याओं को लेकर कितनी लापरवाह है|

दरअसल, दो साल पहले एकाएक बंद कर दिए गए बाल श्रमिक विद्यालयों के तकरीबन एक हजार शिक्षक-कर्मचारी आधी उम्र में बेरोजगार हो गए हैं| संख्याबल में ये बहुत कम हैं फिर भी लगातार आंदोलन कर रहे हैं कि कभी तो उन्हें न्याय मिलेगा। इनका आंदोलन फिलहाल राजधानी के लाखे नगर में चल रहा है| इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने तय किया कि बाल मुंडवाकर विरोध करेंगे|  यह चल रहा था, तभी एक महिला कर्मचारी आगे आईं और मुंडन करवा लिया|

दृश्य कुछ ऐसा मार्मिक हुआ कि महिला की साथी आंदोलनकारियों की आंखें भी नम हो गईं| मुंडन के बाद इन कर्मचारियों ने मांग की है कि उनका शिक्षाकर्मियों की तरह शिक्षा विभाग में संविलियन किया जाए और शासन साफ करे कि उनका भविष्य क्या है|

छत्तीसगढ़ की रमनसिंह सरकार पर इस धरने का प्रभाव कब पड़ेगा, इस बात का अंदेशा लगाना तो मुश्किल है, लेकिन इस बेरोज़गारी का असर प्रदेश की जनता पर जरूर हो रहा है और यह तस्वीरें उनके दर्द की कहानी बयां कर रही है|

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