अब नहीं मिलेगी पेंशन…

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हिमाचल प्रदेश से एक बड़ी ख़बर सामने आई है। वित्तीय घाटे से परेशान 20 निगम और बोर्ड के कर्मचारियों को सरकार ने गहरी चोट दी है। अब उन्हें पेंशन नहीं मिलेगी। अब तक करीब तीन हजार कर्मचारी रिटायर भी हो चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में खराब वित्तीय स्थिति का हवाला दिया है।

सरकार ने कहा कि उन्होंने एक तबके का हित नहीं देखना है। उस पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मसलों की भी जिम्मेदारी है। ऐसे में वह निगमों और बोर्ड के रिटायर कर्मचारियों को पेंशन नहीं दे सकती।

अब कर्मचारी इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे। पहले उन्होंने हाईकोर्ट में केस जीता था। इसके बाद सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। कांग्रेस सरकार ने पेंशन का विरोध किया था। इस कारण प्रभावित कोर्ट में केस हार गए, परंतु कोर्ट की डबल बेंच के फैसले को इसी कोर्ट में चुनौती दी गई। अब इस पर बड़ी बेंच सुनवाई करेगी।

कोर्ट ने राज्य सरकार से भी जवाब तलब किया था। 2004 के बाद पेंशन राज्य सरकार ने 29 अक्टूबर 199 को सरकारी कर्मियों की तर्ज पर सार्वजनिक क्षेत्र के लेफ्ट आउट कर्मचारियों के लिए भी पेंशन स्कीम लागू कर दी। इसके बाद 15 मई 2003 को फैसला लिया कि जो कर्मचारी नए भर्ती होंगे, उन्हें पेंशन की सुविधा नहीं होगी उन्हें इसकी जगह कंट्रीब्यूटेड पेंशन स्कीम दी जाएगी।

कुशाग्र

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