अपने ही डीजीपी को नहीं पहचानते यूपी पुलिस के दरोगा और सिपाही

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उत्तरप्रदेश पुलिस के दो पुलिसकर्मियों की लापरवाही का मामला सामने आया है। वे इतने लापरवाह हैं कि डीजीपी को पहचान भी नहीं पाए। मामला उस वक्त हुआ, जब पुलिस महानिदेशक ओमप्रकाश सिंह (डीजीपी) अचानक गौतमबुद्ध नगर जिले की नोएडा स्थित आम्रपाली पुलिस चौकी का निरीक्षण करने पहुंचे। वहां उन्होंने दरोगा हरिभान सिंह और सिपाही योगेश कुमार को वर्दी गलत ढंग से पहने हुए देखा, जिसके लिए उन्होंने दोनों को ठीक से वर्दी पहने के लिए टोका। इससे नाराज़ दोनों उनसे बहस करने लगे।

दरअसल, डीजीपी ओमप्रकाश सिंह सिविल ड्रेस में थे। उनके साथ उनकी तीन सितारा गाड़ी और एस्कॉर्ट भी था। इसके बावजूद दोनों उन्हें पहचान नहीं पाए। इसके बाद डीजीपी ने इसकी सूचना एसएसपी को दी। एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए दोनों को सस्पेंड कर दिया।

डीजीपी अचानक आम्रपाली पुलिस चौकी पहुंचे थे, जिसकी सूचना किसी को भी नहीं थी। जब वे निरीक्षण करने पहुंचे, तब आम्रपाली चौकी के पास सब इंस्पेक्टर हरिभान सिंह और कांस्टेबल योगेश कुमार खड़े थे। हरिभान ने टोपी नहीं पहन रखी थी, जबकि कांस्टेबल योगेश की टोपी पर से अशोक चिन्ह का निशान गायब था। इसके बाद डीजीपी ने दोनों को बुलाया तो वे उन्हें पहचान नहीं पाए। उल्टा उनसे बहस करने लगे।

क्या होता है पुलिस महानिदेशक ?

भारत में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एक तीन सितारा रैंक और भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उच्चतम श्रेणी के पुलिस अधिकारी होते हैं। डीजीपी हर भारतीय राज्य में राज्य पुलिस बल का प्रमुख होता है।

प्रशासनिक दृष्टि से प्रत्येक राज्य को क्षेत्रीय मंडलों में बांटा जाता है, जिसे रेंज कहते हैं। प्रत्येक पुलिस रेंज, पुलिस महानिदेशक के प्रशासनिक नियंत्रण में होता है। एक रेंज में अनेक जिले हो सकते हैं। जिला पुलिस को मुख्यतः पुलिस डिवीजन, सर्कलों और थानों में विभाजित किया जाता है। नागरिक पुलिस के अलावा राज्य के पास अपनी खुद की सशस्त्र पुलिस रखने का अधिकार भी है और उनमें अलग से गुप्तचर शाखाएं, अपराध शाखाएं आदि का प्रावधान भी होता है।

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