Video : DCP ने उगली सच्चाई, कहा, मैंने उसे कुत्ते की तरह मार डाला….

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मुंबई पुलिस की हिरासत में 30 साल पहले हुई हत्या का राज आख़िरकार सामने आ ही गया। इस मामले में एक रिटायर्ड डीसीपी इस मामले का खुलासा करते हुए कैमरे में कैद हो गया। इस वीडियो में रिटायर्ड डीसीपी (DCP Bhimrao Sonawane ) हत्या के बारे में गहन जानकारी दे रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद यह पर्दाफाश हो गया कि किस तरह डीसीपी ने खुद को इसे ख़ुदकुशी बताते हुए बचा लिया। यह वीडियो क्लिप एक व्यवसायी राजेंद्र ठक्कर ने मुंबई पुलिस को सौंपी है।

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DCP Bhimrao Sonawane Video :

https://www.youtube.com/watch?v=HQZ7IhAoiL0

इस वीडियो क्लिप में रिटायर्ड डीसीपी भीमराव सोनवणे (DCP Bhimrao Sonawane ) खुद इस बात का खुलासा अपने कार्यालय में बैठ कर करते हुए दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि व्यवसायी राजेंद्र ठक्कर और डीसीपी भीमराव सोनवणे रिश्तेदार हैं और दोनों के बीच विवाद चल रहा है। फिलहाल ठक्कर ने यह वीडियो क्लिप मुंबई के वर्ली पुलिस स्टेशन को सौंपी है। वर्ली पुलिस अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत ही 30 साल साल पहले साल 1990 में कथित रूप से एक कैदी की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस ने ठक्कर को पूछताछ के लिए भी बुलाया था।

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इस पूरे मामले में मुंबई हाईकोर्ट में ठक्कर ने एक याचिका दायर कर रिटायर्ड डीसीपी भीमराव (DCP Bhimrao Sonawane ) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। बताया जा रहा है कि जिस वक़्त यह घटना हुई थी उस दौरान भीमराव वर्ली पुलिस स्टेशन में निरीक्षक के पद पर तैनात थे। वहीं इस क्लिप के बारे में भीमराव का कहना है कि यह उन्हें फ़साने की साजिश है। भीमराव का दावा है कि यह एक कहानी बना रहे हैं और उन्हें फ़साने की चाल चल रहे हैं। यह वीडियो क्लिप साल 2018 की है जिसे ठक्कर के मलाड कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज से निकाला गया है।

यह पूरी घटना साल 1990 की है जब 1 मई 1990 को एक व्यक्ति रत्तू गोसावी को गिरफ्तार किया गया था। इस वीडियो क्लिप में भीमराव (DCP Bhimrao Sonawane ) को कहते हुए सुना जा सकता है कि, “वह काफी समय से रत्तू को पकड़ना चाहते थे। रत्तू के खिलाफ 27 मामले दर्ज थे।” इसके बाद डीसीपी कहते हैं कि, “वह वर्ली से था मैंने उसके अंडकोष में ज़ोर से मारा। जब भी मैं किसी आरोपी को गिरफ्तार करता, मैं उसे कुत्ते की तरह पीटता…उसे थाने ले जाने से पहले उसकी हड्डियां तोड़ देता।”

इसके बाद डीसीपी ने कहा कि उन्हें रत्तू की मौत की जानकारी एसीपी ने कुछ समय बाद दी और बताया कि उसकी मौत हो गई है। इसके बाद डीसीपी कहते हैं कि एसीपी ने उसकी आंखों की जांच करने के लिए कहा.. वह मर चुका था… लेकिन एक घंटे पहले तक वह जिन्दा था तो फिर अचानक उसकी मौत कैसे हुई?

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हालांकि भीमराव (DCP Bhimrao Sonawane ) का कहना है कि उन्होंने रत्तू को अस्पताल में दाखिल करवाने की कोशिश की थी। डीसीपी ने यह भी दावा किया है कि उसकी मौत पुलिस कस्टडी में नहीं बल्कि अस्पाल में हुई है। इस वीडियो में वे कह रहे हैं कि, “हमें यह दिखाना होगा कि वह अस्पताल में मर गया और पुलिस की हिरासत में नहीं।”

उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने किस तरह से प्लानिंग कर थाने के बाहर गोसावी को लाए और उसे एम्बुलेंस में बैठाया ताकि देखने वालों को लगे की गोसावी खुद चलकर वैन में बैठा है। इसके बाद उन्होंने कहा कि गोसावी ने जेल के अंदर खुद को घायल कर लिया।

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