हनुमान जी को बचाने के चक्कर में बह गया पुजारी

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बिहार राज्य के कई इलाके जलमग्न हो चुके हैं और लोग बढ़ से बेहाल हो चुके हैं। बिहार के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। मधुबनी के नरुआर गांव में तो बाढ़ का यह आलम है कि यहां तो 50 से 60 पक्के मकान तक बाढ़ की भेंट चढ़ गए। मधुबनी के इस गांव में स्थित मंदिर में रखी बजरंगबली की मूर्ती को बचाने के लिए मंदिर के पुजारी ने अपनी जान गंवा दी (Temple Pujari Drain In Flood)। जी हां, संकट मोचन हनुमान जी को बाढ़ से बचाने के लिए खुद पुजारी ने अपनी न्योछावर कर दी।

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पुजारी का नाम दिगम्बर मंडल बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संकट मोचन बजरंगबली जी के इस मंदिर का निर्माण पिछले साल ही करवाया गया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि मंदिर के पुजारी से कई बार लोगों ने कहा कि बाढ़ बहुत ज्यादा है इसलिए आप यहां से चले जाइए लेकिन वे नहीं माने और कहते रहे कि हम यहां से नहीं जाएंगे। लोगों का कहना है कि पुजारी का कहना था कि जब हमारे बजरंग बली चले जाएंगे तो हम भी चले जाएंगे। और वह पुजारी बजरंगबली की मूर्ति को पकड़े वहीं जमा रहा। लेकिन बाढ़ काफी बढ़ जाने के बाद जब बहाव तेज हो गया था पुजारी इसमें बह गया। पुजारी जैसे ही बाढ़ के पानी में बहा (Temple Pujari Drain In Flood) वैसे ही उसके पीछे-पीछे बजरंगबली की मूर्ती भी बह गई।

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मंदिर के पुजारी (Temple Pujari Drain In Flood) दिगम्बर मंडल का शव 3 दिन बाद बरामद किया जा सका। लगभग 3 दिन बीत जाने के बाद पुजारी का शव बेहद ही बुरी हालत में एक पेड़ में फंसा हुआ मिला। शव को निकालने के लिए प्रशासन को स्थानीय लोगों की मदद लेनी पड़ी। इसके बाद पुजारी के शव को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचा दिया। बिहार में बाढ़ ने बेहद ही विकराल रूप धारण किया हुआ है। ऐसे में अब सरकार को सख्त और उचित कदम उठाने की बेहद आवश्यकता है। बाढ़ में फंसे हुए लोगों को जरूरी मदद पहुंचाना अब सरकार की प्राथमिकता है और यह सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है।

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