जयपुर सरकार का शराब पर प्रहार

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बिहार की तर्ज पर अब राजस्थान की राजधानी और गुलाबी नगरी जयपुर में भी, शाराब के सेवन पर प्रतिबंध लगाया गया है। अब जयपुर में सामुदायिक भवनों में किसी भी कार्यक्रम के दौरान मांस और मदिरा का सेवन नहीं किया जाएगा। शहरी सरकार यानी नगर निगम ने सामुदायिक भवनों में मांस और शराब के सेवन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। वहीं नगर निगम के इस फैसले पर राजस्थान की सत्ता संभालने वाली कांग्रेस सरकार ने आपत्ति जताते हुए इसे, जनहित के खिलाफ बताया है।

कांग्रेस सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। गौरतलब है कि जयपुर नगर निगम में बीजेपी का बोर्ड है। गुलाबी नगरी में शादी से लेकर पारिवारिक कार्यक्रम तक सामुदायिक भवनों में आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में अब नगर निगम ने इन भवनों में आयोजित होने वाले किसी भी कार्यक्रम में मांस, शराब और तंबाकू के सेवन पर पांबदी लगा दी है। इस मामले में जयपुर के महापौर का कहना है कि, सामुदायिक भवनों में मांसाहार के सेवन से गंदगी होती है, और आस-पास के लोग इसके बारे में शिकायत करते हैं। इन शिकायतों की वजह से ही इन भवनों, मांस और मदिरा के सेवन पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगते हुए कहा कि भाजपा ने सिर्फ सियासी मकसद से यह फैसला किया है।

कांग्रेस ने निगम से अपने फैसले पर एक बार पुनर्विचार करने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि एक बड़ा वर्ग निगम के इस फैसले के कारण इन भवनों का उपयोग करने से वंचित हो जाएगा। हालांकि स्वच्छता की दृष्टि से उठाया गया यह कदम कितना सार्थक हो पाएगा यह तो आने वाला वक़्त ही बता पाएगा। उससे पहले गुलाबी नगरी कहा जाने वाला जयपुर स्वच्छता के पैमाने पर अभी तक खरा नहीं उतरा है। पिछले साल हुए स्वच्छता सर्वे में जयपुर को 39 वा स्थान हासिल हुआ था। (प्रभात)

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