50 साल लिव इन रिलेशनशिप में रहे, अब बच्चों ने करवाई शादी, 73 का दूल्हा, 67 की दुल्हन

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आपने ये गाना तो सुना ही होगा ” ना उम्र कि सीमा हो ना जन्म का हो बंधन जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन” जी हां कहते हैं कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती, तो इसी प्रकार प्यार करने के बाद शादी की भी उम्र नहीं होती। हाल ही में इसी तरह का एक वाक्या हकीकत में मुक्कमल हुआ है। आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ कबीरधाम (Groom of 73 bride of 67) जिले के ग्राम खैरझिटी कला में शनिवार को एक अनोखी शादी हुई है। इसमें दूल्हे की उम्र 73 साल और दुल्हन की उम्र 67  (Groom of 73 bride of 67, live in relationship ) साल है। पिछले 50 सालों से यह दंपति शादी की सामाजिक रस्म को निभाए बिना पति-पत्नी की तरह ही रह रहा था।

इनके बच्चों ने बुजुर्ग जोड़े की इच्छा पूरी करने के लिए सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ शादी की रस्में पूरी की। शादी भी गांव में आयोजित नवधा रामायण कार्यक्रम के दौरान हुआ। इस शादी का गवाह पूरा गांव बना है। 50 साल से बिना शादी के रह रहे दंपति सुकाल निषाद और गौतरहिन बाई की शादी हुई है। इसे देखने के लिए क्षेत्र के ग्रामीण भी पहुंचे हुए थे।

ऐसे निभाएं रिलेशनशिप

चलिए आपको सुकाल निषाद कि लव स्टोरी (Groom of 73 bride of 67, live in relationship) के बारे में बताते है, दरअसल सुकाल शादी की उम्र में लड़की देखने बेमेतरा जिले के ग्राम बिरसिंगी गए हुए थे,जिस लड़की से रिश्ते की बात चल रही थी, उसकी छोटी बहन गौतरहिन उन्हें पसंद आ गई। इसके बाद दोनों में बात और मुलाकात होने लगी। कुछ समय बाद गौतरहिन ने सुकाल के संग जिंदगी बिताने का फैसला किया। सुकाल मजूदरी करते थे, तब आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे शादी कर ले। समाज के लोगों को भोज कराए। इसं देखते हुए दोनों ने बिना शादी किए ही पति-पत्नी की ही तरह जिंदगी गुजराने लगे। बिना शादी के रहने के बाद भी ग्रामीण, समाज और परिजनों ने कोई विरोध नहीं किया।

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इस अनोखी शादी को लेकर गांव में खुशी का माहौल है। क्षेत्र के लोग ग्रामीणों से शादी के बारे में जानकारी भी ले रहे हैं। नवधा रामायण के दौरान हुए इस शादी में ग्रामीणों ने विशेष सहयोग दिया। दपंती के बच्चे और नाती-नातिन भी इस विवाह में शरीक हुए। ग्राम के नवनिर्वाचित सपरपंच पवन चंदरौल, रामचंद्र जायसवाल, बुधारू जायसवाल, रामविलास जायसवाल, गुलाब साहू, ईश्वर साहू, अनिल चंद्रवंशी, सुरेश चंद्रवंशी, संचालक नेतराम चंद्रवंशी ने विशेष भूमिका निभाई। इस दौरान ग्रामीणों ने डीजे की भी व्यवस्था की थी। जिस पर सभी लोग झूमकर नाचे।

सुकाल ने अपने हम उम्र बुजुर्गों (Groom of 73 bride of 67, live in relationship) के बीच इच्छा जाहिर की थी कि उन्हें शादी की परंपरागत रस्में निभानी हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार यह जीवन में जरूरी है, इससे मोक्ष मिलेगा। इस पर गांव के अन्य लोगों ने विचार किया कि और इस बात को समाज में रखा। जिसके बाद तय किया गया कि इस जोड़े की पारंपरिक शादी की इच्छा को पूरा किया जाना चाहिए। वहीं गांव में आयोजित नवधा रामायण कार्यक्रम के दौरान इनकी शादी की गई। सुकाल के दो बेटे और एक बेटी हैं। बेटे दिलहरन ने बताया कि पिता की इस इच्छा को पूरा करके वे बहुत खुश हैं। सुकाल के दो बेटों की चार-चार बेटियां हैं। वे भी अपने दादा-दादी की शादी में शामिल हुईं। सुकाल की बेटी विमल की पांच बेटियां भी अपने नाना-नानी की शादी में बाराती बनकर पहुंचीं थीं।

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-मृदुल त्रिपाठी

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