ज़िंदा मरीज़ को बनाया मृत

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महाराष्ट्र के सांगली जिले के सरकारी अस्पताल में एक ज़िंदा मरीज को मृत बताने का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन ने एक मरीज़ को मृत बताकर उसके परिजन को किसी अन्य व्यक्ति का शव सौंप दिया और ज़िंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी कर दिया। जब परिवारजन ने आपत्ति जताई कि यह शव उनके मरीज का नहीं है तो सरकारी डॉक्टरों ने उन्हें मृत्यु प्रमाण-पत्र दिखाते हुए दावा किया कि यही शव उनके मरीज का है।

परिजन की जब नहीं सुनी गई तो वे अविनाश का शव समझकर उसे अपने घर ले आए। अविनाश की मौत की खबर सुनकर गांववाले और रिश्तेदार भी इकट्ठा हो गए। शव का अंतिम दर्शन करते समय किसी को भी यह विश्वास नहीं हो रहा था कि यह अविनाश का शव है, लेकिन मृत्यु प्रमा- पत्र देखकर सभी चुप हो गए। इसके बाद रिश्तेदारों ने शव को फिर से जिला अस्पताल लाकर पूछताछ की, जिसके बाद पता चला कि अस्पताल प्रशासन ने जिसे अविनाश का शव बताया था, वह दरअसल किसी और का है। बाद में अस्पताल में अविनाश जीवित पाया गया। इस घटनाक्रम पर परिजन ने कड़ी नाराजगी जताई और अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा।

सांगली जिला अस्पताल की अधिष्ठाता डॉ. पल्लवी सापले ने इस घटनाक्रम पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करना अक्षम्य अपराध है। इस मामले की जांच होगी और जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।

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