मेघालय से हटाया गया विवादास्पद ‘अफ्सपा’

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मेघालय से विवादास्पद आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर्स एक्ट (अफ्सपा) को पूरी तरह से हटा लिया गया है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में केवल आठ थाना क्षेत्रों तक ही इसे सीमित कर दिया गया है। मेघालय के सभी क्षेत्रों से 31 मार्च से यह कानून हटा लिया गया है। गृह मंत्रालय ने सोमवार को यह फैसला लिया है।

जाने क्या है अफ्सपा ?

1 सितंबर 1958 में भारतीय संसद ने अफ्सपा को लागू किया था, जो एक फौजी कानून है। यह असम, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा सहित भारत के उत्तर-पूर्व में लागू किया गया था। अफ्सपा जिन इलाकों में लागू होता है वहां पूरा नियंत्रण सेना के हाथ में होता है। सेना इस कानून के तहत किसी भी इलाके को ‘डिस्टर्ब’ घोषित करके वहां के नागरिकों को गिरफ्तार कर सकती है। सशस्त्र बल किसी भी व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकते हैं।

एक्ट हटाने की मांग

अफ्सपा सेना को जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के विवादित इलाकों में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देता है। इस एक्ट को लेकर काफी विवाद है और इसका दुरुपयोग का आरोप लगाकर लंबे समय से इसे हटाने की मांग की जाती रही है। नॉर्थ ईस्ट के साथ जम्मू-कश्मीर में कई दिनों से इस एक्ट को रद्द करने के लिए विभिन्न संगठन आवाज उठा रहे थे।

नागालैंड में लागू रहेगा

नागालैंड में कई दशक पहले से ही अफस्पा लागू है। तीन अगस्त 2015 को पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नगा उग्रवादी समूह एनएससीएन-आइएम महासचिव थुइंगलेंग मुइवा और सरकार के वार्तातार आरएन रवि के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद नागालैंड से अफस्पा नहीं हटाया गया है। आपको बता दें कि त्रिपुरा ने साल 2011 में अफस्पा को समाप्त हो गया है, वहीं जम्मू-कश्मीर में भी अफस्पा लागू है।

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