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महाराष्ट्र में सीएम बनने के लिए शिवसेना ले रही कांग्रेस का समर्थन

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महाराष्ट्र में कुर्सी के लिए भाजपा (BJP) और शिव सेना (Shiv Sena) के बीच खींचतान लगातार जारी है। अभी तक दोनों ही दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। अब ऐसी खबर सामने आ रही है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस और शिवसेना मिलकर सरकार का दावा पेश कर सकती हैं। दरअसल भाजपा और शिवसेना के बीच जारी खींचतान के दौरान आज यानी शनिवार को कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक खत लिखा। इस खत में कांग्रेस पार्टी के नेता ने सोनिया गांधी से अपील की है कि यदि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना उनके पास प्रस्ताव लेकर आती है तो वे उनका समर्थन करें।

कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी को यह खत महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य हुसैन दलवई की तरफ से लिखा गया है। हुसैन दलवई की तरफ से लिखे गए इस खत का शिवसेना ने दिल से स्वागत किया है। दलवई ने सोनिया गांधी को लिखे अपने खत में इस बात का भी जिक्र किया कि जब कांग्रेस पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल और बाद में प्रणब मुखर्जी चुने गए तो शिवसेना ने उनका समर्थन किया था। इसके बाद दलवई ने संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा कि – “शिवसेना और भाजपा अलग हैं। शिवसेना ने राष्ट्रपति पद के लिये प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था। शिवसेना की राजनीति भाजपा की अतिवादी रुख के विपरीत सर्व समावेशी बन गई है। भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिये हमें अवश्य ही शिवसेना का समर्थन करना चाहिए।”

इसके बाद हुसैन ने कहा कि महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा वर्ग है। यह मुस्लिम समुदाय का बड़ा वर्ग भाजपा की जगह शिवसेना को ही तवज्जो देगा। हालांकि जहां हुसैन शिवसेना को समर्थन देने की अपील कर रहे हैं वहीं इस मामले में कांग्रेस पार्टी बंटी हुई नज़र आ रही है। इस मामले में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे, सुशील कुमार शिंदे और संजय निरुपम इस अपील पर विरोध जाता रहे हैं। ये तीनों नेता शिवसेना को समर्थन देने के खिलाफ हैं। वहीं जब दलवई के पत्र के बारे में शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, “दलवई समाजवादी विचारधारा से आते हैं। वह प्रगतिशील मुसलमानों के परिवार से आते हैं। हम उनके रुख का स्वागत करते हैं। लेकिन, शिवसेना ने एक गठबंधन में यह चुनाव लड़ा था और हम अंत तक गठबंधन धर्म का पालन करेंगे।”

Prabhat Jain

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