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चिन्मयानंद केस : आधे कांग्रेसी जेल में, आधे टंकी पर चढ़ कर मांग रहे न्याय

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फिल्म शोले का वो सीन तो सभी को याद ही होगा जब धर्मेंद्र यानी वीरू पानी की टंकी पर चढ़ जाता है और अपनी जान देने की धमकी देता है। ऐसा ही कुछ नजारा उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में देखने को मिला। दरअसल यहां कुछ कांग्रेसी नेता टाउन हॉल स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। मामला चिन्मयानंद केस का है। इस मामले में छात्र को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस नेताओं ने आंदोलन चला रखा है। इसी आंदोलन के चलते कुछ कोंग्रेसी नेताओं को पानी की टंकी का सहारा लेना पड़ा।

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दरअसल पूरा मामला यह है कि अपने आंदोलन के तहत जेल में बंद छात्रा की रिहाई की मांग के लिए कोंग्रेसी नेता न्याय यात्रा निकलना चाह रहे थे। हालांकि प्रशासन द्वारा इस यात्रा पर रोक लगा दी गई। यात्रा की अनुमति न मिलने से कांग्रेसी नेता भड़क गए। कांग्रेस के तमाम नेता अपनी इस यात्रा को निकालने का प्रयास करते रहे। यात्रा निकालने जाने के प्रयास के लिए प्रशासन ने जितिन प्रसाद समेत कई अन्य कांग्रेसी नेताओं को हिरासत में भी ले लिया। अब कांग्रेस नेताओं को पीड़ित छात्रा के साथ ही अपने साथी नेताओं की भी रिहाई करवानी थी। कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद लखीमपुर के रहने वाले प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव अली नकवी और जिला पंचायत सदस्य सूरज सिंह चौहान अपन कुछ साथियों के साथ टाउन हॉल स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए।

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पानी की टंकी पर चढ़कर सभी नेता सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी करने लगे। इन नेताओं की मांग है कि हिरासत में लिए गए तमाम नेताओं को रिहा किए जाए। इसके अलावा उनकी मांग चिन्मयानंद केस में रेप की धारा बढ़ाने, पीड़िता को रिहा करने और उसका मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की है। इतना ही नहीं कांग्रेस की इस न्याय यात्रा में शामिल होने के लिए पड़ोसी जिलों के जो नेता आने वाले थे, पुलिस प्रशासन ने उन्हें भी शाहजहांपुर में रोक दिया। अली नकवी और सूरज सिंह चौहान लगभग 9 साथियों के साथ पानी की टंकी पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे। ये सभी नेता पीड़िता को बिना शर्त रिहा करने, धारा 376 बढ़ाए जाने, अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने, मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की लगतार मांग कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन सभी नेताओं ने अधिकारियों को बुलाए जाने की मांग भी की है ताकि उनकी सुनवाई हो सके।

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Prabhat Jain

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