पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जो… 

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जैसे-जैसे तकनीकों और सुविधाओं का विकास होता जा रहा है वैसे-वैसे अपराधी भी अपराध करने के नए-नए तरीके अपनाने लग गए हैं| आपने कई ऐसे मामले सुने होंगे, जिसमें अपराधी अलग तरीके से अपराध को अंजाम देते हैं, लेकिन आज हम आपको जिस तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं, वह तरीका सबसे अनोखा है| अपराध का यह तरीका जानकर आप चौंक जाएंगे| दरअसल, हरियाणा के सोनीपत में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो बेहद बीमार कैंसर पीड़ित मरीजों का पहले तो एक्सीडेंटल बीमा करवाता था और फिर बीमारी से मौत हो जाने के बाद उनकी लाश का एक्सीडेंट करवाकर बीमा रकम वसूल लेता था।

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भारती एक्सा बीमा कंपनी (Bharti AXA Insurance Company) की फ्राड एंड इन्वेस्टीगेशन यूनिट के एसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट अमन बेदी (Aman Bedi) ने पुलिस को बताया था कि कुछ लोग कैंसर के मरीजों का बीमा करवाने के बाद उनकी मौत के बाद उसे हादसा दिखाकर धोखाधड़ी से क्लेम राशि ले रहे हैं, जिसकी जांच सोनीपत एसटीएफ को दी गई थी। जांच टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना पवन, मोहित व विकास को रोहतक के पास से गिरफ्तार किया। तीनों उन कैंसर पीड़ितों का पीजीआई में रिकार्ड नष्ट करने जा रहे थे, जिनकी हादसे में मौत दिखा चुके थे।इन पर भारती एक्सा के साथ ही इफको टोक्यो, पीएनबी मेट लाइफ, एलआईसी, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, एचडीएफसी एर्गो, इडलवाइस टोक्यो, एएक्सए, केनरा, कोटक, एचएसबीसी, मैक्स लाइफ, फ्यूचर जेन, बजाज फाइनेंस, एलवाईएफ, अपोलो मुनिच व बिरला सन लाइफ आदि के साथ धोखाधड़ी का आरोप था।

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एसटीएफ के डीएसपी राहुल देव ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों आरोपियों के साथ ही आठ अन्य की भूमिका मामले में संदिग्ध है। इस पर पुलिस ने लिवासपुर निवासी जोनी सरोहा, रोहट निवासी प्रदीप, गांव तिहाड़ निवासी सचिन, गांव राई निवासी राजेश, रोहतक के सेक्टर-2 निवासी पदम खर्ब, पानीपत के उग्राखेड़ी निवासी राकेश, दिल्ली के नरेला के गौतम नगर निवासी रवींद्र को भी नामजद किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने सभी सदस्यों की अलग-अलग जिम्मेदारी लगा रखी थी। इनमें कोई पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों से मिलीभगत करता था तो किसी का काम दुर्घटना दिखाने के लिए गाड़ी का इंतजाम करना था। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों की तलाश में छापेमारी करनी शुरू कर दी है। पुलिस ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर छह दिन के रिमांड पर लिया है।

विभागों में खलबली

गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद एसटीएफ जिस तरह से पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की संलिप्तता की बात कर रही है, उससे दोनों विभागों में खलबली है। एसटीएफ के अधिकारी की माने तो कई पुलिस कर्मचारी व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। मामले में पीजीआई के कर्मचारी एसटीएफ की जांच में सबसे अधिक फंसते नजर आ रहे हैं|

एसटीएफ की जांच में मृतकों के परिजन भी पुलिस की राडार पर है। उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। जिससे उनके बारे में सबूत जुटाकर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके। पुलिस के पास आरोपियों की बातचीत के सबूत भी हैं। जिसमें वह मृतकों के परिजनों से बातचीत कर रहे हैं। पुलिस को की गई शिकायत में बीमा कंपनी की तरफ से कैंसर पीड़ितों की हादसा दिखाने के फेर में हत्या तक किए जाने का भी शक जताया गया है, जिसकी जांच जारी है।

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