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बाजार में बिक रहे कैंसर वाले केले, रहें सावधान

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वैसे तो बाजार में बिकने वाले फल लोग काफी सोच-समझकर खरीदते हैं। यह फल व्यक्ति को कई तरह की बीमारी से भी बचाते हैं कियोंकि इनमे जरूरी पोषक तत्व, विटामिन्स और मिनिरल्स पाए जाते हैं। लेकिन अगर आपसे यह कहा जाए कि जो केले (Bananas) बाजार में बिक रहे हैं उनके सेवन से आपको कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है तो? यह बात सुनकर आपको थोड़ा धक्का जरूर लग सकता है लेकीन यह बात पूरी तरह से हकीकत है। दरअसल आजकल बाजार में जो केले उपलब्ध हैं उन्हें समय से पूर्व पकाने के लिए उनमें जहरीले पदार्थ (Poisonous Substances) मिलाए जाते हैं। यदि आप इन जहरीले पदार्थों से युक्त केलों का सेवन करते हैं तो आपको कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है।

गौरतलब है कि जो केले (Bananas) बाजार में आते हैं उन्हें समय से पूर्व पकाने के लिए उनमें कैल्शियम कार्बाइट (Calcium Carbide) डाला जाता है। यह कैल्शियम कार्बाइट मनुष्यों में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी पैदा कर सकता है। इस बात की जानकारी खुद असम राज्य कृषि विपणन विभाग (State Agricultural Marketing Department) के अध्यक्ष पालित कुमार बोरा ने दी है। दरअसल शुक्रवार को पंजाबाडी स्थित विपणन क्षेत्र में एक प्रेस वार्ता (Press Conference) आयोजित की गई थी। इस प्रेस वार्ता में कृषि विपणन विभाग के अध्यक्ष पालित कुमार बोरा ने यह बात कही। इस प्रेस वार्ता से पहले पालित कुमार बोरा ने एक केला पकाने वाले एक केंद्र का उद्घाटन भी किया।

असम में चलने वाले केले महोत्सव (Banana Festival) के दौरान बोरा ने जैविक विधि से पकाए जाने वाले केलों (Bananas) को देवब्रत- मालभोग के नाम से बाजार में उतारे जाने का ऐलान किया। यह केले एनजीबी ग्रीन की मदद से ए एंड आग्रेनिक्स द्वारा जैविक विधि से पकाए गए हैं। इसकी घोषणा करते हुए बोरा ने कहा कि इन केलों में कोई भी खतरनाक कैमिकल नहीं है और यह जैविक विधि द्वारा पकाए जाने की वजह से पुष्टिदायक और लाभकारी हैं। इस केले का नाम दरंगगिरि के युवा केला कृषक देवब्रत राभा के नाम पर रखा गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राभा ने 54 हजार मालभोग केले के पेड़ लगाए हैं। इतने पेड़ लगाकर राभा ने नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।

बोरा ने बताया कि पहले केलों (Bananas) को बर्फ में पकाया जाता था जो जरा भी नुक्सान नहीं पहुंचाते थे। लेकिन अब केमिकल से पकाए जाने की वजह से यह बेहद ही खतरनाक हो गए हैं। काले-काले चित्ते वाले केले फायदेमंद होते थे क्योंकि उन्हें प्राकृतिक रूप से या फिर बर्फ में पकाया जाता था। लेकिन अब केमिकल से पके होने की वजह से केले एक दम चमकदार और पीले रंग के दिखते हैं। यह सिर्फ देखने में सुंदर होते हैं लेकिन इनसे कई घातक बीमारियां हो सकती हैं।

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