जान हथेली पर रखकर स्कूल जाते बच्चे

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बच्चों को पढ़ाई की ओर अग्रसर करने के लिए सरकार ने ‘सर्व शिक्षा अभियान’ जैसी कई योजनाएं बनाई हैं| इसके बाद भी देश में कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें अभी तक आधारभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं| कई स्थानों पर पढ़ाई के लिए लालायित बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं|

गुजरात के खेड़ा जिले में भी बच्चों को स्कूल जाने के लिए जान हथेली पर रखनी पड़ रही है| यहां सरकार की लापरवाही के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन अभी तक किसी का इस समस्या की ओर ध्यान नहीं गया| दरअसल, नाएका और भेराई गांव को जोड़ने वाला पुल लगभग दो महीने से टूटा हुआ है| यहां के बच्चे टूटे हुए पुल के पिलर्स पर कूद-कूदकर स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं|

इस वीडियो में दिख रहा है कि कैसे बच्चों को नाला पार करवाया जा रहा है| यदि किसी व्यक्ति से थोड़ी भी चूक हुई या किसी का हाथ फिसला तो बच्चों की जान भी जा सकती है|

गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि यदि बच्चे इस पुल से नहीं जाएंगे तो उन्हें लगभग 10 किलोमीटर घूमकर स्कूल पहुंचना होगा| इसलिए गांव के बच्चे और अन्य ग्रामीण 10 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाने के बजाय नाले पर बने पुल के पिलर्स के सहारे ही दूसरी तरफ जा रहे हैं| ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार पुल बनाने के लिए आवेदन दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई न होने के कारण वे बच्चों की जान जोखिम में डालकर उन्हें स्कूल भेजने को मजबूर हैं| वहीं अधिकारियों का कहना है कि बारिश के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है जैसे ही बारिश रुकेगी वैसे ही पुल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा|

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