सोहराबुद्दीन केस में सभी आरोपी बरी

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सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ मामले(Sohrabuddin Encounter Case Verdict) में 13 साल बाद फैसला आ गया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। सीबीआई की विशेष अदालत ने अपने फैसले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि साजिश और हत्या साबित करने के लिए मौजूद गवाह और सबूत संतोषजनक नहीं हैं।

इस केस की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के 92 गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे। विशेष न्यायाधीश एसजे शर्मा ने दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। केस में गुजरात और राजस्थान के कई पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इस केस में अभियोजन पक्ष का आरोप था कि सोहराबुद्दीन का संबंध आतंकी संगठन से था। वह गुजरात के किसी बड़े नेता ही हत्या करने की साजिश कर रहा था।

क्या है मामला ?

आतंकवादियों से संबंध रखने वाला कथित गैंगस्टर शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी प्रजापति को गुजरात पुलिस ने 22 और 23 नवंबर 2005 की दरमियानी रात अगवा कर लिया था। सीबीआई के के मुताबिक, शेख की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी। उसकी पत्नी को तीन दिन बाद मार दिया और शव को ठिकाने लगा दिया। एक साल बाद 27 दिसंबर 2006 को प्रजापति को गुजरात और राजस्थान पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में गोली मारकर हत्या कर दी। अभियोजन ने इस मामले में 210 गवाहों से पूछताछ की थी। जिसमें से 92 मुकर गए।

कोर्ट ने किया बरी –

– मुकेश कुमार

– नारायण सिंह धाबी

– बालकृष्ण राजेंद्र प्रसाद चौबे

– रहमान अब्दुल खान

– हिमांशुसिंह राजावत

– श्यामसिंह जयसिंह चरण

–  अजय परमार

– संतराम शर्मा

– नरेश चौहान

– विजयकुमार राठौड़

– राजेंद्र कुमार

– घट्टमनेनी श्रीनिवास राव

– आशीष पंड्या

– नारायण सिंह चौहान

– युवधिरसिंह चौहान

– मोहनसिंह सोलंकी

– कानजीभाई

– विनोद कुमार

– किरणसिंह चौहान

– करणसिंह सिसोदिया

– रमनभाई कोदारभाई पटेल

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