अगर जिंदा होता सोहराबुद्दीन तो पीएम मोदी….

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सीबीआई की विशेष अदालत ने सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और तुलसी प्रजापति के मुठभेड़ के मामलों में (सोहराबुद्दीन मुठभेड़ केस)सभी 22 आरोपियों को शुक्रवार को बरी कर दिया। सीबीआई की विशेष अदालत के जज ने अपने फैसले में कहा कि, सभी गवाह और सबूत काफी नहीं थे। कोर्ट ने सबूतों के अभावों में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। वहीं इस मामले में आरोपी रहे आईपीएस डीजी वंजारा ने बड़ा बयान दिया।

वंजारा ने कहा कि अगर गुजरात एटीएस सोहराबुद्दीन को नहीं मारती तो वह तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या कर देता। आज यह साबित हो गया कि मैं और मेरी टीम सही थी। हम सच के साथ थे। इससे पहले सितंबर महीने में बॉम्बें हाईकोर्ट ने देश के चर्चित सोहराबुद्दीन मुठभेड़ में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पूर्व एटीएस प्रमुख डीजी वंजारा समेत अन्य पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया था।

उन्होंने कहा, ‘कुछ राजनीतिक कारणों से मैंने 9 साल जेल में बिताए, लेकिन आज सच सबके सामने है।’  इस मामले में सीबीआई कोर्ट में गुजरात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों अभय चूड़ास्मा, पीसी पांडे, राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, गुजरात के पूर्व गृहमंत्री और अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी गीता जौहरी को भी बरी कर दिया।

बता दें कि इस मामले में 22 आरोपियों में 21 गुजरात और राजस्थान पुलिस के कनिष्ठ स्तर के कर्मी हैं। 22वां आरोप गुजरात के फार्म हाउस का मालिका है। जहां कथित रूप से मारने के पहले शेख और कौसर बी को रखा गया है।

सोहराबुद्दीन केस में सभी आरोपी बरी

सोहराबुद्दीन मामले में गुजरात के पूर्व डीआईजी वंजारा बरी

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