website counter widget

शिवराज सिंह चौहान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने के मायने

0

भाजपा के सबसे लोकप्रिय चेहरे और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) को भाजपा केंद्रीय संगठन ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (Party Vice Presidents) से नवाज़ दिया है। यदि इस पदोन्नति पर कोई भी गौर करें तो प्राथमिक रुप से यही समझेगा कि भाजपा केंद्रीय संगठन ने शिवराज को उनके कद के मुताबिक जिम्मेदारी देने की कोशिश की है, वहीं कई राजनीतिक विश्लेषक अपने-अपने मतलब निकाल रहे हैं।

क्या शिवराज ( Party Vice Presidents) को अब प्रदेश से बाहर किया जा रहा है? क्या शिवराज अब सांसद का चुनाव लड़ेंगे? क्या शिवराज का प्रदेश संगठन में प्रभाव खत्म हो रहा है? क्या भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री से अपना पिंड छुड़ाना चाहती है? या फिर अब राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शिवराज सिंह चौहान से कोई बदला ले रहे हैं? इन सभी सवालों के जवाब खुद बड़े राजनीतिक विश्लेषकों के पास नहीं हैं ।

लगातार 13 सालों तक मध्यप्रदेश में भाजपा का चेहरा रहे शिवराज की सत्ता जाते ही यह तो समझ में आने लगा है कि जब तक कुर्सी है तब तक ही जी हूजूरी है। कुर्सी नहीं तो कुछ नहीं। जैसे ही शिवराज के नाम के आगे पूर्व लगा  वैसे ही उनकी गिनती पिछली पात में होने लगी। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री बनने के बाद भी शिवराज का अंदाज़ नहीं बदला। वे आज भी यदि किसी विधानसभा में सभा कर रहे हैं तो कांग्रेस पर उसी दमदारी से हमला कर रहे हैं, जैसा कि किसी विपक्ष के नेता को करना चाहिए।

आज भी उनकी सभा में उतने ही लोग आ रहे हैं जितने की किसी लोकप्रिय नेता की सभा में आने चाहिए। वहीं शिवराज के साथ अभी सेल्फी लेने और उनका स्वागत करने वालों की होड़ सी लगी हुई है, जो साफ करती है कि मध्यप्रदेश में उनका सिक्का खरे कलदार की तरह खनक रहा है।

चुनाव हारने के बाद से ही शिवराज को लेकर राजनीतिक भविष्यवाणियों का भी दौर शुरु हुआ। किसी ने कहा कि अब शिवराज को केंद्र में ले जाया जाएगा, तो किसी ने कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष बनकर प्रदेश की राजनीति में विपक्ष की भूमिका को मजबूत करेंगे। वहीं उत्तरप्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता संघप्रिय गौतम ने तो यहां तक कह दिया था कि यदि भाजपा को आगामी लोकसभा का चुनाव जीतना है तो शिवराज सिंह चौहान को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और नितिन गडकरी को उप प्रधानमंत्री बना देना चाहिए।

लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत बात यही है कि यहां सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है और यही कारण है कि कभी-कभी एक ही दल के नेताओं की विचारधाराएं भी यहां भिन्न हो सकती हैं।

ऐसे में अचानक भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने अचानक ही तीनों राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्रियों को एक साथ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ( Party Vice Presidents) की गद्दी पर बैठाकर क्या संदेश देने की कोशिश की यह लोग अब समझ नहीं पा रहे हैं। ये तीनों ही नेता यदि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नहीं भी होते तो भी उनका कद बड़ा ही होता, लेकिन यह जगदिखाऊ पदोन्नति क्यों हुई इसका अर्थ अब किसी की भी समझ से परे है।

कांग्रेस इस जिम्मेदारी को शिवराज को मध्यप्रदेश से बाहर करने की चाल बता रही है, तो शिवराज इसे अपने लिए अब एक बड़ी चुनौती मानकर आगे बढ़ने का दावा कर रहे हैं। कुछ राजनीतिक चाणक्य इसे शिवराज के लिए केंद्र की राजनीति का पहला कदम मान रहे हैं, तो कुछ इसे उनकी ठलती राजनीति का आखिरी सलाम कह रहे हैं, लेकिन शिवराज नाम का सूरज कुछ घंटों के लिए छुपने के बाद किस दिशा से उदित होगा इसका सभी को इंतजार भी है।

– राहुल

रहें हर खबर से अपडेट, ‘टैलेंटेड इंडिया’ के साथ| आपको यहां मिलेंगी सभी विषयों की खबरें, सबसे पहले| अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए आज ही डाउनलोड करें Download Hindi News App और रहें अपडेट| ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ख़बरों को फेसबुक पर पाने के लिए पेज लाइक करें – Talented India News

48 घंटे में घर की ये परेशानी दूर…

राजधानी में फिर गई मासूम की जान

किसकी चोटी सीएम कमलनाथ ने काटी ?

ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.