अपनी गिरफ्तारी पर रोमिला थापर ने दिया बयान

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“देश में पिछले चार सालों में डर और भय का माहौल बढ़ा है और यह माहौल आपातकाल की तुलना में ज़्यादा डराने वाला है।” यह कहना है इतिहासकार रोमिला थापर का। प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किए गए पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में से इतिहासकार रोमिला थापर भी एक हैं।

मीडिया पर्सन से बातचीत में रोमिला थापर ने देश के मौजूदा हालात और पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हो रही कार्रवाई पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, ” महाराष्ट्र पुलिस ने इन पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के घर पहुंचकर कहा कि आपको गिरफ़्तार किया जाता है।  हम लोगों ने अपनी याचिका में यह कहा है कि ये लोग स्थापित और जाने-माने लोग हैं, कोई क्रिमिनल नहीं हैं कि आप इन लोगों को उठाकर जेल में डाल दें।”

रोमिला के अलावा गिरफ्तार किए गए बाकी लोगों के बारे में पूछने पर रोमिला ने कहा, “मैं इन लोगों को व्यक्तिगत तौर पर जानती हूं। यदि आप किसी को गिरफ़्तार करने पहुंचते हैं तो आपके पास पूरी जानकारी होनी चाहिए कि आप उन्हें क्यों गिरफ़्तार कर रहे हैं।  गिरफ़्तारी की प्रक्रिया भी होती है कि आप वजह बताते हुए उन्हें अपनी बात रखने का मौका दें।

इन लोगों पर पुणे के भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।  इनमें से कुछ लोग तो वहां शारीरिक तौर पर उपस्थित भी नहीं थे।  इन लोगों पर ऐसे आरोप लगाए गए हैं, जैसे उन्होंने बंदूक या फिर लाठी उठाकर हिंसा की हो, लेकिन ये सारे लोग लिखने वाले और पढ़ने-पढ़ाने वाले लोग हैं। इस आरोप में हिंसा का मतलब क्या है?

सुधा भारद्वाज वकील हैं, आनंत तेलतुंबड़े आर्थिक और सामाजिक विश्लेषण करने वाली इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली में लगातार लिखने वाले हैं।  इनमें एक कार्यकर्ता की एक्स्ट्रीम लेफ्ट सोच रही है, लेकिन क्या यह आधार हो सकता है कि आप किसी को जेल में डाल दें। ग़ौरतलब है कि कोर्ट ने इन सभी लोगों को एक सप्ताह तक अपने-अपने घर पर नज़रबंद रखने का आदेश दिया है।

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