क्या चीन ने जानबूझकर दुनिया में फैलाया कोरोना वायरस

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दुनियाभर में कहर बरपा रहे कोेरोना वायरस को लेकर अब सभी देश एकजुट होकर लड़ तो रहे हैं, लेकिन कोरोना वायरस के चीन में कम होते मामले और दुनिया में बढ़ते मरीज इस ओर भी इशारा कर रहे हैं कि कहीं यह चीन की कोई सोची समझी साजिश तो नहीं। कई ऐसे सवाल हैं जो आज हर किसी के मन में उठ रहे हैं।

जैसे- क्या कोरोना वायरस का टीका पहले से चीन के पास है?
कोरोना चीन के वुहान के अलावा और कहीं क्यों नहीं फैला?
क्या कोरोना के जरिए दुनिया को नीचे गिराना चाहता है चीन?
क्या बड़े देशों की अर्थव्यवस्था तोड़कर चीन बनेगा महाशक्ति?
ये सवाल हैं, जो मौजूदा हालात में पैदा हो रहे हैं और हर तरफ से शक की सुई चीन की तरफ ही घूम रही है। शक तो तब भी पैदा हुआ था जब चीन में इस वायरस के फैलने और इसके इलाज का दावा करने वाले डाॅक्टर को रातों रात ठिकाने लगा दिया गया था। वहीं चीन की सच्चाई दिखाने वाले अमेरिकी पत्रकारों को भी चीन ने अपने देश से बाहर कर दिया था।
इसके अलावा भी कई कारण हैं जो इस प्रकार हैं-

जैसे- आप खुद ही सोचिए कि इतना खतरनाक वायरस कोरोना जिसने पूरी दुनिया में तबाही मचाई वह चीन की राजधानी क्यों नहीं पहुंचा। क्या वुहान से बीजींग की दूरी तय करना इस वायरस के लिए कोई कठिन काम था।
वहीं चीन ने पहले दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की कि वह खुद इस वायरस के चलते काफी परेशानी में है। उसने मरीजों की संख्या को लेकर पहले वल्र्ड मीडिया में खबरें छपवाई। इसके बाद चीन ने आनन फानन मंे जिस तरह से अस्पताल बनाकर यह साबित किया कि वह फटाफट नीति के तहत अपने देश के लोगों को बचाने में सक्षम है। उससे दुनिया को भी यह लगा कि वाकई चीन की परेशानी वाजिब है।

डब्ल्यूएचओ ने भी इसे महामारी घोषित करने में काफी देर लगाई, जबकि उसे दिख रहा था कि इसके परिणाम क्या हो सकते हैं।
इस वायरस का एंटी डोड चीन के पास हो इस बात का शक इससे भी मजबूत होता है कि जब चीन के राष्टपति शी जिनंपिंग अपने लोगांे से मिलने के लिए और कोरोना पीड़ित इलाकों का जायजा लेने के लिए निकले तो उन्होंने सिर्फ एक साधारण फेस मास्क लगा रखा था, जबकि किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष को इन हालातों मंे पूरी तैयारी के साथ जाना चाहिए। इससे लगता है कि चीन ने पहले ही अपने आका को इसका इंजेक्शन लगा दिया था। वैसे भी पूरी दुनिया के कई लीडर कोरोना की चपेट में आए, जिनमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जाॅन्सन, कनाड़ा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और उनकी पत्नी,लेकिन चीन में कोई बड़ी हस्ति इसका शिकार नहीं हुई।

वहीं चीन के मित्र राष्ट्र जैसे रुस और उत्तर कोरिया में कोरोना का असर ना के बराबर है। जबकि चीन के प्रतिद्वंदी देश या शत्रु राष्ट्र में इसकी मात्रा हद से ज्यादा है। सभी राष्ट्र इससे ग्रसित हैं।

जब कोरोना वायरस को लेेकर चीन की आलोचना हो रही थी तब चीन ने ही लोगों से यह कहा था कि हमें गले लगाईये यह इंसान से इंसानों में नहीं फैलता है और इसके बाद इटली मंे एक चीनी महिला द्वारा यह संक्रमण फैला और आज तस्वीर दुनिया के सामने है।
इस स्थिती का फायदा भी चीन ने खूब उठाया। चीन ने अरब देशों से सस्ता पेट्रोल और सोना खरीदा, जबकि लगातार गिरती अर्थव्यवस्था में उसने शेयर मार्केट में भी तगड़ा पैसा लगाया।

अब आगे क्या-
कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया के बाज़ार तबाह हुुए हैं। ऐसे में चीन उन बाज़ारों में अपने उत्पादों को पहुंचाकर अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करना चाहेगा।

लगातार नीचे आए वैश्विक शेयर बाज़ार में कई कंपनियों के शेयर चीन की कपंनियांे द्वारा खरीदे गए हैं, जो अब बाज़ार उठते ही उन कंपनियों के बड़े मुनाफेदार बन जाएंगे।

पूरी दुनिया के कई बड़े देशों को चीन सेना के जरिए तो नहीं, लेकिन अर्थव्यवस्था के जरिए हरा देगा।
यदि कुछ दिनों बाद चीन यह दावा भी कर देता है कि उसने कोविड-19 का टीका बना भी लिया है, तो वह महंगे दामों पर इसे दुनिया में बेचेगा और इससे मुनाफा कमाएगा।

ऐसे में अब कोरोना महामारी का सामना कर रही दुनिया चाहकर भी चीन को कुछ बोलने से तो रही। अब देखना होगा कि दुनियाभर में 7 लाख से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाने वाले इस वायरस के प्रकोप को खत्म करने के बाद चीन का सामना दुनिया कैसे करती है। और क्या दुनिया के बड़े संगठन चीन पर कोई कार्रवाई करते हैं। क्या चीनी साजिश का पर्दाफाश करने में भी कोई देश सफल होता है।

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