इंदौर में बोहरा समाज के कार्यक्रमों में शामिल हो रहे धर्मगुरु

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बोहरा समाज के प्रमुख धर्मगुरु सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन इन दिनों इंदौर में अपने सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत कर रहे हैं। इस दौरान वे अलग-अलग स्थानों पर जाकर समाज को दर्शन दे रहे हैं। बोहरा समाज के 53वें  धर्मगुरु सोमवार को बोहरा बाखल स्थित एक ऐतिहासिक मस्जिद में पहुंचे। उन्होंने सैफी मोहल्ला मौज़े की मस्जिद का इफ्तेताह फ़रमाया। यह मस्जिद 200 वर्ष पुरानी है। सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन साहब ने उनके जीवन की सबसे प्रथम वाअज़ 1388 हिजरी में इसी स्थान पर फरमाई थी।

इस मस्जिद की खासियत यह भी रही है कि यहां 45वें , 46वें , 47वें , 48वें , 49वें , 51वें , 52वें  तथा 53वें  दाई ने नमाज़ अदा करवाई है। मस्जिद की इमारत 200‌ वर्ष पुरानी है,‌ परंतु इसकी आधुनिक संरचना का निर्माण किया गया है,  जिसका उद्घाटन कल शाम मगरिब की नमाज़ के पहले सैयदना साहब के हाथों किया गया।

दाऊदी बोहरा समाज के मीडिया प्रभारी मज़हर हुसैन सेठजीवाला ने बताया कि सैफी मोहल्ला की मस्जिद के उद्घाटन के बाद खुशी की मजलिस वहां अक्त की गई। मजलिस के दौरान मौला ने फ़रमाया कि यह मस्जिद बनाने वालों को खुदा बरकत दें और उनकी आने वाली ‌पीढ़ियों को भी इसका अज़र अता करे। उन्होंने सभी समाजजन को संबोधित करते हुए कहा कि खुदा सभी को खुश रखे और एक मौला हुसैन के ग़म के सिवाय कोई ग़म न दिखाएं। इन‌ दुवाई‌ कलेमातों के बाद पूरी मस्जिद हुसैन या हुसैन की निदा‌ से गूंज उठी।

मज़हर हुसैन सेठजीवाला ने बताया कि मोहल्ला की मस्जिद काफी बड़ी बनाई गई है। यहां बसने वाले मोमीनों की कुल संख्या 2029 है। कॉलोनी में तकरीबन 843 पुरुष, 878 महिलाएं और 308 बच्चे रहते हैं। इन‌ सभी समाजजन के घरों के बीच यह मस्जिद है। फिलहाल यहां एक जमात कार्यालय भी बना हुआ है, जिसमें एक जनरल फिजिशियन लोगों की मदद के लिए बैठते हैं।

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सैयदना साहब को देख नम हो उठी बेताब निगाहें

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