राज हथियाओं नीति के निशाने पर अब राजस्थान

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मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को नेस्तनाबूद किये अभी ज्यादाअरसा नहीं बीता था कि मोदी शाह की नजर कांग्रेस शासित राजस्थान पर पड़ी. अशोक गहलोत की सरकार को गिराने के लिए कांग्रेस की सबसे मजबूत और अशोक गहलोत के लिए सबसे कमजोर कड़ी पर मोदी और शाह ने वार किया. सचिन पायलट अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए जाने के समय से ही लगातार उनका विरोध करते रहे हैं ऐसे में इस कमजोर कड़ी को बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले और मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह ने  भांप लिया. मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को गिराने के लिए उन्होंने पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने खेमे में मिलाया उसी तरह इस बार उनके निशाने पर आए पूर्व मंत्री और राजस्थान में कांग्रेस का बड़ा चेहरा बन चुके सचिन पायलट .सचिन पायलट ने दावा किया कि उनके साथ 20 से 22 विधायक हैं और वह कमलनाथ की तरह अशोक गहलोत को भी कुर्सी से उतार देंगे . खबर यह भी है कि सचिन पायलट भी ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में शामिल होने का मन बना चुके हैं.

एक बात जो सबके सामने आई है कि राज्य की लालसा में यदि बीजेपी  उन्हें को नीति का तिलांजलि देनी पड़े तो उन्हें इस से भी गुरेज नहीं है इ.कई उदाहरण अमित शाह पहले भी दे चुके हैं .आज बीजेपी का परचम भारत के अधिकांश राज्यों में  फहरा रहा है .केंद्र से लेकर सभी बड़े राज्यों में फिलहाल बीजेपी की सरकार राज कर रही है ऐसे में कुछ राज्यों में कांग्रेस की सरकार अमित शाह की नजर में हमेशा खटकती रही हैं . वैसे भी मोदी और अमित शाह का मूल मंत्र कांग्रेसमें हिंद भारत का है. राजस्थान के सरकार को गिराने के लिए सचिन पायलट को अपने खेमे में लाने की पुरजोर कोशिश इसी निती का परिणाम है.बहरहाल विधायकों की बैठक में सीएम अशोक गहलोत ने अपने साथ सौ विधायकों की मौजूदगी में खुद को मजबूत बताया है लेकिन ऐसा कमलनाथ भी कर चुके हैं, अंत समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डूबती हुई नैया को छोड़ा और कमलनाथ को बीच मझधार में ही कुर्सी से उतार दिया ऐसा ही कुछ अशोक गहलोत के साथ दोहराया जा सकता है. 

प्रश्न यह उठता है कि क्या सिर्फ राजनीति के लिए मोदी और शाह की जोड़ी किसी हद तक भी गुजर जाएगी देश में फिलहाल चीन नेपाल और पाकिस्तान के संकट बड़े हैं .ऐसे में अमित शाह का एक बयान भी नहीं आया और  वे आगामी चुनाव की तैयारियों में लग चुके हैं . उन्होंने बिहार में चुनावी रैली कर अपनी सियासी भुख जाहिर की हैं. राजस्थान की सरकार गिराने में लगे हुए  अमित शाह स्पष्ट बहुमत की सरकार का मतलब कुछ और ही समझते हैं. बहुमत की सरकार देश को सुचारू रूप से चला सकती है क्योंकि उसे किसी से पूछना नहीं होता लेकिन यहां पर स्पष्ट बहुमत को मनमर्जी का अमलीजामा पहनाकर मोदी और शाह की जोड़ी देश के अहित के काम किए जा रहे हैं . देशभक्त हिंदू भक्त और बड़ी पार्टी के रूप में खुद को साबित करने वाली बीजेपी लगातार अपनी मनमर्जी के चलते एक के बाद एक गलत कदम उठाए जा रही है जिसे जनता देख भी रही है और समझ भी रही है. लेकिन मोदी और शाह की जोड़ी  को गोदी मीडिया पर बड़ा भरोसा है, वह जानते हैं कि उनकी हर गलती को बड़ी सफाई से छुपा लिया जाएगा .जहां देश एक और बीजेपी सांसदों विधायकों पार्षदों और छोटे-मोटे नेताओं की गुंडागर्दी सह रहा है वहीं केंद्र और राज्य स्तर पर मोदी और शाह की मनमर्जी और खुदगर्जी को भी झेल रहा है.विपक्ष को इस तरह  मिटाने की यह रणनीति प्रथम दृष्टया बिल्कुल सही बैठती है क्योंकि राजनीति और जंग में सब कुछ जायज है और आजकल सियासत किसी जंग से कम नहीं लेकिन बात यदि देश हित के की जाए तो एक सही सरकार को चलाए जाने के लिए मजबूत विपक्ष का होना बेहद आवश्यक है .विपक्ष जो सरकार की गलतियां गिनवा सके, जो गलत कामों का विरोध कर सकें और सही कामों को करवाने के लिए सरकार पर जोर दे सके, लेकिन लगता है मोदी और शाह के डिक्शनरी में विपक्ष के प्रति सम्मान और विपक्ष का महत्व है ही नहीं उन्हें सिर्फ एक ही मंत्र अक्षर से पूर्ण करना है कांग्रेस विहीन भारत.

लेकिन कांग्रेस विहीन भारत शायद जिंदा रह सके नीति विहीन भारत खुद कोो कहां तक जिंदा रख पाएगा कह पाना मुश्किल है.

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