पढ़ें राजनीतिक पारी शुरू करने वाले रायपुर कलेक्टर की कहानी

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राजनीति में कई बार हुआ है कि बड़े अधिकारी जनसेवा करने के लिए अपनी नौकरी छोड़कर जनता की सेवा करने आए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी आईएएस के पद से इस्तीफा देकर ही कांग्रेस में शामिल हुए थे और फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने। अब अजीत जोगी की राह पर ही रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी चल पड़े हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि जोगी कांग्रेस के साथ थे और ये कलेक्टर भाजपा के साथ हैं।

रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीति में जाने की घोषणा कर दी है।  2005 बैच के आईएएस ओपी चौधरी जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं। कयास  हैं कि वे भाजपा प्रत्याशी के रूप में रायगढ़ जिले की खरसिया विधानसभा से कांग्रेस विधायक उमेश पटेल के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमनसिंह के ख़ास रहे चौधरी ने अपने इस्तीफे का ऐलान सोशल मीडिया के जरिये भी किया। उन्होंने फेसबुक पर लिखा “मेरे बायंग गांव की गलियों से निकलकर रायपुर के कलेक्टर बनने तक के 13 साल के सफर में जिंदगी ने मुझे अनेक चुनौतीपूर्ण अवसर दिये। इस सफर में हजारों लोगों ने मुझे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से साथ दिया, उन्हें शुक्रिया अदा करने के लिए हिन्दी शब्दावली का कोई भी शब्द कम पड़ेगा। मैं अब अपनी माटी और अपने लोगों की बेहतरी के लिये अपना पूरा समय देना चाहता हूं इसलिए मैंने आईएएस की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया है। जय-हिंद, जय-छत्तीसगढ़।”

काम के लिए जाने जाते हैं चौधरी

कलेक्टर के रूप में ओपी चौधरी छत्तीसगढ़ का काफी जाना माना नाम हैं। चौधरी ने लोगों की भलाई के लिए कई तरह के नवाचारों को धरातल पर उतारा था। दंतेवाड़ा कलेक्टर के पद पर रहते हुए उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को विज्ञान की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया था। साथ ही इंजीनियरिंग तथा मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग भी विद्यार्थियों को दिलवाई थी। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय स्कूल की शुरुआत की थी। चौधरी ने जिले के गीदम ब्लाक  स्थित एक छोटे से गांव ‘जावंगा’ को  2011 में शिक्षा के एक बड़े केन्द्र के रूप में विकसित किया था। चौधरी ने जिले में लाइवलीहुड कॉलेज की भी शुरुआत की थी। जिसे बाद में पूरे प्रदेश में लागू किया गया। 2011-12 में बेहतर काम के लिए उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा एक्सीलेंस अवार्ड भी दिया गया था।

संघर्ष से पाया मुकाम

महज 22 साल की उम्र में आईएएस बने ओपी चौधरी का जीवन काफी संघर्ष से भरा रहा। बचपन में 8 साल की उम्र में ही उनके पिता का देहांत हो गया था।  इसके बाद उनकी मां ने गरीबी और संघर्ष में उन्हें पढ़ाते हुए बड़ा अधिकारी बनाया। ओपी चौधरी ने भी  मेहनत करते हुए अपनी मां का सपना पूरा किया। ओपी चौधरी को मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के काफी नज़दीकी माना जाता है। बताया जा रहा है कि डॉ. रमनसिंह के सुझाव पर ही उन्होंने भाजपा में आने का निर्णय लिया है। चर्चा है कि भाजपा उन्हें खरसिया सीट से टिकट दे सकती है।  खरसिया विधानसभा क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। फिलहाल इस सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल विधायक हैं।

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