राऊ की प्रस्तावित स्कीम-165 को लेकर प्रदर्शन

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किसानों  और ज़मीन मालिकों ने इंदौर विकास प्राधिकरण पर उनकी जमीन पर कब्ज़ा किए जाने का आरोप लगाया है। आईडीए ने कुछ समय पहले किसानों और ज़मीन मालिकों से जमीन लेकर राऊ स्थित स्कीम नंबर 165 डेवलप की थी, जिसके एवज में आईडीए ने किसानो को मुआवजा और विकसित प्लॉट देने की बात कही थी। किसानों का आरोप है कि अब आईडीए उनके साथ तानाशाह जैसा बर्ताव कर रहा है।

उनके अनुसार, आईडीए ने उनकी जमीन ले ली और अब न मुआवजा दे रहा है और न ही कोई विकसित प्लॉट। अब किसान चाहते हैं कि आईडीए द्वारा विकसित स्कीम नंबर 165 अब ख़त्म कर दी जाए ताकि उन्हें उनकी ज़मीन वापस मिल सके। करीब एक घंटे तक नारेबाज़ी करने के बाद किसानों ने ज्ञापन सौंपते हुए इस स्कीम को खत्म करते हुए उन्हें जमीन वापस देने की मांग की। सभी किसान अपनी मांग मनवाने के लिए शुक्रवार दोपहर बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर आईडीए दफ्तर पहुंचे। सभी लोग आईडीए के खिलाफ तख्तियां लेकर पहुंचे थे। कई लोग परिसर में ही धरने पर बैठ गए।

करीब एक घंटे तक माहौल गरमाया हुआ था, जिसके बाद आईडीए अधिकारियों ने  स्कीम 165 को रद्द करने का ज्ञापन ले लिया और किसान वहां से चले गए।  2012 में आईडीए ने राऊ की स्कीम नंबर 165 को लेकर ज़मीन मालिकों से अनुबंध किए थे। अनुबंध के समय आईडीए ने किसानों से  सवा सौ करोड़ रुपए मुआवजा देने की घोषणा की थी,लेकिन अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया। साथ ही आईडीए ने किसानों को विकसित प्लॉट देने के बाद ही उनकी ज़मीन पर काम शुरू करने की बात कही थी।

ऐसे में ज़मीन मालिक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे है। इससे पहले भी इस स्कीम को लेकर कई बार आंदोलन और विवाद हो चुके हैं। वहीं आईडीए के अनुसार, वे अभी तक 20 करोड़ रुपए से ज्यादा मुआवजा यहां बांट भी चुका है, लेकिन किसान अब इस स्कीम से मुक्ति चाहते हैं।

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