तीनों मंत्रियों के विभागों में ये हैं दिक्कतें

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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लंबे इंतज़ार के बाद अपने 28 मंत्रियों को विभागों का बंटवारा तो कर दिया, लेकिन इनमें इंदौर के हिस्से में काफी चुनौतियों भरे विभाग आए। उम्मीद यह थी कि इंदौर के तीनों नेताओं में से कम से कम दो को तो बड़े विभाग (Indore Kamal Nath Cabinet Minsiter List 2018 With Departments ) मिलेंगे, लेकिन इन नेताओं को सामान्य विभागों से ही संतुष्ट होना पड़ा।

इंदौर के तीनों मंत्रियों को जो जिम्मेदारियां दी गई हैं, उन्हें निभाना उनके लिए बड़ी चुनौती भी होगी।(Indore Kamal Nath Cabinet Minsiter List 2018 With Departments )

सिलावट की मुश्किलें

इंदौर से तुलसी सिलावट को वरिष्ठता के आधार पर बड़ा मंत्रालय मिलने की संभावना थी, लेकिन उन्हें लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय दिया गया है। पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य की स्थिति को बेहतर बनाने से पहले सिलावट के लिए अपने ही क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित करना बेहद ही बड़ी जिम्मेदारी है।  सांवेर विधानसभा में ही कई सामुदायिक और शासकीय स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जिनमें डॉक्टर ढूंढे से नहीं मिलते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कई बार यहां डॉक्टरों की नियुक्ति भी की, लेकिन सरकारी अस्पतालों की हालत यहां नहीं सुधर पाई। वहीं कई सालों से निर्माण के लिए इंतजार में खड़े इंदौर जिला अस्पताल का काम शुरू करवा पाना और उसे जल्द से जल्द पूरा करना भी सिलावट के लिए बड़ी चुनौती होगी।

जीतू की जिम्मेदारी

जीतू पटवारी को वैसे तो राहुल गांधी खेमे से होने के कारण बड़ा मंत्रालय दिए जाने की चर्चा थी, लेकिन उन्हें खेल और युवा  कल्याण विभाग दिया गया है। ऐसे में पटवारी को इंदौर में खेल के नए मैदान देने से लेकर खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं दिलवाने की भी कठिन जिम्मेदारी निभानी होगी। इंदौर के नेहरू स्टेडियम के खस्ताहाल पर भी अब पटवारी को सोचने की ज़रूरत रहेगी। वहीं कई छोटे स्पोर्ट्स क्लब, जो अब तक सरकार की तरफ आस लगाए देखते थे, उन्हें भी पटवारी से राहत मिलने की उम्मीद है। उच्च शिक्षा मंत्री के तौर पर भी पटवारी इंदौर सहित प्रदेश के सरकारी कॉलेजों की हालत सुधार पाना भी पटवारी के लिए बड़ी चुनौती होगी।

वर्मा की चुनौतियां

वरिष्ठ नेता और प्रदेश में एक बार फिर से मंत्री बने सज्जनसिंह वर्मा को उनकी वरिष्ठता के अनुसार, नगरीय प्रशासन विभाग और जनसंपर्क विभाग देने की चर्चा तेज़ थीं, लेकिन उन्हें पीडब्ल्यूडी और पर्यावरण मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है। पीडब्ल्यूडी की कमान संभालते हुए वर्मा के लिए यह बड़ी चुनौती होगी कि वे इस विभाग को लेटलतीफी वाली छवि से उबार पाएं। इस विभाग में कोई काम कभी भी समयसीमा में पूर्ण नहीं होते है। खुद इंदौर के पीसी सेठी अस्पताल के निर्माण में भी पीडब्ल्यूडी ने करीब 16 से 18 माह की देरी की थी| इसी कमी को दूर करना वर्मा के लिए चुनौती है।

गौरतलब है कि कमलनाथ के मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन पर पूरा ध्यान दिया गया है। मंत्रिमंडल में राज्य के तीनों बड़े नेता कमलनाथ, दिग्विजयसिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन वाले विधायकों को जगह दी गई है। मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री कमलनाथ के 11, दिग्विजयसिंह के नौ, ज्योतिरादित्य सिंधिया के सात और अरुण यादव खेमे के एक मंत्री को शामिल किया गया है।

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