प्रदेश की धरोहरों का निजीकरण

0

मध्यप्रदेश बहुत सी प्राचीन और चर्चित धरोहरों को समेटे है| प्रदेश में कई किले हैं, जिनका अपना महत्व है| ये धरोहरें सदियों से लोगों के दिलों से जुड़ी हैं| ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा राज्य की कुछ धरोहरों का निजीकरण पूर्ण रूप से सही है या नहीं, यह कहना मुश्किल है|

राज्य सरकार पर्यटन स्थलों का निजीकरण कर रही है| पर्यटन विभाग ने अपने पास मौजूद 5 हेरिटेज में से दो हेरिटेज परिसम्पत्तियां निजी निवेशकों को आवंटित कर दी गई हैं। इससे विभाग को 8 करोड़ 64 लाख की राशि प्राप्त हुई है। पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेन्द्र पटवा ने बताया कि रीवा में गोविंदगढ़ फोर्ट और भोपाल का ताजमहल पैलेस निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद निजी निवेशकों को आवंटित किया जा चुका है| इस साल दतिया का राजगढ़ पैलेस, भोपाल का बेनजीर पैलेस और सतना का माधवगढ़ फोर्ट हेरिटेज होटल स्थापित करने के लिए निजी निवेशकों को सौंप दिया जाएगा।

प्रदेश की अन्य धरोहरों को भी राज्य सरकार ने निजीकरण के लिए चिन्हित किया है, जिनमें उज्जैन का कोठी महल, ग्वालियर का मोती महल और गवर्नमेंट प्रेस भवन, शिवपुरी का नरवर फोर्ट, श्योपुर का श्योपुर फोर्ट, गुना का बजरंग फोर्ट, मुरैना का सबलगढ़ फोर्ट, सागर का राहतगढ़ फोर्ट, पन्ना का महेन्द्र भवन, टीकमगढ़ का बल्देवगढ़ फोर्ट, धार का लुनेरा की सराय, बड़वानी का कलेक्टर भवन, जबलपुर का रॉयल होटल, कटनी का विजयराघवगढ़ फोर्ट, मण्डला का रामनगर फोर्ट और रीवा का क्योटी फोर्ट शामिल है|

आज तक ये धरोहर सरकार के हाथों में ही रही है| सरकार निजीकरण के माध्यम से इन जगहों में पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कर रही है| आगामी वर्षों में निजी निवेशकों के माध्यम से हेरिटेज होटलों के विकास के लिए हेरिटेज परिसम्पत्तियों का बैंक बनाया जाएगा|

Share.