SC-ST ACT:  संशोधन को राष्ट्रपति की मंजूरी, फुले का विरोध

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अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति संशोधन अधिनियम को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है| अब इस अधिनियम के अंतर्गत दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी होगी| मामला दर्ज कराते ही गिरफ्तारी के प्रावधान बनाए गए हैं| इसके लिए प्रारंभिक जांच की भी आवश्यकता नहीं होगी| राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद एससी-एसटी कानून पहले की तरह ही सख्त प्रावधानों युक्त बन गया है| वहीं भाजपा की बहराइच  से सांसद सावित्रीबाई फुले की पार्टी  ने इस फैसले को सियासी छलावा बताया है| उनका कहना है कि केंद्र सरकार हमें छल रही है| संशोधन सरकार के फायदे के लिए किया गया है|

नहीं मिलेगी अग्रिम जमानत

गौरतलब है कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि एसटी-एससी अत्याचार निरोधक कानून में शिकायत मिलने के बाद तुरंत मामला दर्ज नहीं होगा| डीएसपी पहले शिकायत की प्रारंभिक जांच करके पता लगाएंगे कि मामला झूठा या दुर्भावना से प्रेरित तो नहीं है| इसके बाद पूरे देश में विरोध के स्वर सुनाई दिए थे|

पहले सरकार ने अग्रिम जमानत का भी रास्ता खोल दिया था, लेकिन यह फैसला एसटी-एससी समुदाय के लोगों को पसंद नहीं आया था| इस फैसले के बाद देशव्यापी विरोध हुआ था, जिसके बाद सरकार ने कानून को पूर्ववत रूप में लाने के लिए एससी-एसटी संशोधन बिल संसद में पेश किया और अब उसे राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिल गई है|

भाजपा सांसद सावित्रीबाई फुले ने प्रतापगढ़ में आरक्षण बचाओ महासम्मेलन में कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी और उप्र की योगी आदित्यनाथ सरकार, अनुसूचित जाति-जनजाति का हित नहीं चाहती है| उन्होंने कहा कि इस बात से साबित होता है कि दिल्ली में संविधान जलाया जाता है और मोदी सरकार कोई कदम नहीं उठाती है| उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है| अनुसूचित समाज यह स्पष्ट तौर पर जान गया है कि केंद्र और प्रदेश की सरकार की मंशा क्या है|

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