जम्मू-कश्मीर में सरकार की तैयारी, मुख्यमंत्री होंगे बुखारी

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जम्मू कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए एक-दूसरे की घोर प्रतिद्वंदी पार्टियों पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस ने एक साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला कर लिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पीडीपी के नेता अल्ताफ बुखारी इस महागठबंधन वाली सरकार के मुख्यमंत्री पद का चेहरा हो सकते हैं।

पीडीपी के नेता अल्ताफ बुखारी ने जानकारी दी है कि जल्द ही तीनों पार्टियों के नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने के लिए दावा पेश कर सकते हैं। पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपने बयान में बुखारी ने कहा कि तीनों पार्टी के नेताओं ने नीतिगत आधार पर गठबंधन का फैसला किया है। फिलहाल मैं इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता।

गौरतलब है कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 28, नेशनल कांफ्रेंस के पास 15 और कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं। यदि तीनों पार्टियां महागठबंधन करती हैं तो तीनों पार्टियों के कुल मिलकर 55 विधायक हो जाएंगे, जो बहुमत के आंकड़े से कहीं ज्यादा है। जम्मू-कश्मीर की कुल 89 सीट हैं और बहुमत पाने के लिए 44 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत है।

मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू है, जिसकी 6 महीने की समयावधि 19 दिसंबर को समाप्त हो जाएगी और इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन टूटने के बाद लागू हुआ था। राज्यपाल शासन के बाद राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए विधानसभा भंग होना ज़रूरी है। गठबंधन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद का कहना है कि फिलहाल इस पर चर्चा चल रही है, लेकिन यह चर्चा अभी सरकार बनाने तक नहीं पहुंची है। नबी ने कहा कि सभी विपक्षी दलों को एक साथ मिलकर सरकार बनानी चाहिए, इसके लिए भी चर्चा की जा रही है।

साल 2015 से इस साल जून तक पीडीपी और भाजपा के गठबंधन वाली सरकार थी, लेकिन भाजपा का पीडीपी से गठबंधन तोड़ने के बाद वहां अभी राज्यपाल शासन लागू है। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इतनी तेजी से फेरबदल होने के पीछे एक कारण सज्जाद लोन का भाजपा के समर्थन से एक अलग मोर्चा खोलने का प्रयास भी है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि पीपुल्स कांग्रेस के नेता सज्जाद लोन भाजपा के समर्थन के साथ एक तीसरा मोर्चा बना सकते हैं और उनके मोर्चे में पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के असंतुष्ट विधायक भी शामिल हो सकते हैं। अभी भाजपा के पास 26 और सज्जाद के पास 2 विधायक हैं।

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