कोरोना से भी घातक है एपोकैलिक वायरस, मिटा सकता है आधी दुनिया

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भारत सहित दुनिया के 200 से ज्यादा देश इस समय कोरोना वायरस से ग्रस्त है और इलाज लाख कोशिशो के बाद भी नहीं मिल पा रहा है. अब तक कुल 60 लाख लोगो को अपने चपेट में ले चूका कोरोना दुनिया के लिए महामारी का रूप ले चूका है और दुनियाभर की सरकारें इससे भयभीत है. इसी बीच एक आस्ट्रलियाई स्वस्थ विशेषज्ञ और वैज्ञानिक डाक्टर माइकल ग्रेगर ने एक नया खुलासा कर दुनिया को और भी चिंता में डाल दिया है . ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डाक्टर माइकल ग्रेगर ने अपनी एक किताब में चेतावनी देते हुए कहा है कि एपोकैलिक नाम का यह वायरस कोरोना से कहीं ज्यादा खतरनाक है और एक बार फैलने के बाद यह आधी से ज्यादा दुनिया को तबाह कर सकता है. इस नए वायरस का कारण उन्होंने मांसाहार की आदत को बताया है .  

डॉ  ग्रेगर ने अपनी किताब में इस जान लेवा एपोकैलिक वायरस के बारे में विस्तार से बताया है र साथ ही बताएं हैं बचाव के लिए उपाय. उनके अनुसार  संतुलित जीवन चर्या और शाकाहार इससे बचने का रामबाण इलाज है . चिकन फार्म मतलब मुर्गी पालन केंद्रों पर पनपता यह वायरस एक जानलेवा वायरस है . एक आस्ट्रलियाई न्यूज़ वेब साईट के अनुसार उन्होंने अपनी किताब हाव टू सरवाईव् ए पेड़ेमिक में लिखा की अनियमित जीवन शैली इसका मुख्य कारण होगी साथ ही चिकन फॉर्म इसके फैलने का मुख्य जरिया होंगे ,साथ ही उन्होंने समय रहते इससे सतर्क रहने की चेतावनी भी दी .

ग्रेगर ने यह भी लिखा –

न्यूट्रिशियनिस्ट ग्रेगर का कहना है कि  जितनी अधिक संख्या में जानवरों को एक साथ रखा जाता है, उनमें वायरस पनपने और उनके अंदर जाकर सर्वाइव करने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है। इसलिए हम कह नहीं सकते कि जिस चिकन को हम टेस्ट के लिए और हैल्थ के लिए खा रहे हैं, उसके मीट और टिश्यूज के साथ जानलेवा वायरस भी हमारे अंदर जा रहे होंगे। न्यूट्रिशियनिस्ट ग्रेगर का कहना है कि बेहतर होगा चिकन के हेल्दी प्रॉडक्शन के लिए हम फर्म्स को छोटा रखें। साथ ही इसमें स्पेस अधिक हो। यानी अधिक स्पेस में कम मुर्गियों का पालन किया जाए। साथ ही हम अपनी डायट में मीट और चिकन को कम करें। नहीं तो जब तक हम मीट बेस्ड डायट खाते रहेंगे, तब तक महामारियों का दौर चलता ही रहेगा’’

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