हनुमानजी की जाति पर तेज़ हुई सियासी बहस

0

भारत की राजनीति में इन दिनों राजनीतिक या सामाजिक मुद्दों से अलग हटकर धर्म और भगवान की जाति का मुद्दा गरमा रहा है। भगवान की जाति और पहचान बताने वाली इस राजनीति में हर राजनेता कूद पड़ा है। चुनावी मौसम में इस बार भगवान की ही जाति पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा के स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ के एक बयान ने सियासत को लोगों के मुद्दों से हटकर एक अलग ही मुद्दा थमा दिया है। भगवान राम के परम भक्त महाबली हनुमानजी की जाति को लेकर आज हर एक नेता अपना-अपना दावा पेश कर रहा है।

योगी आदित्यनाथ के हनुमानजी को वनवासी और पिछड़ा-दलित बताने वाले बयान के बाद अब भाजपा के सांसद और केंद्रीय मंत्री सत्यपालसिंह भी इस बहस में शामिल हो गए हैं। सत्यपालसिंह का कहना है कि “”भगवान राम और हनुमानजी के युग में इस देश में कोई जाति व्यवस्था नहीं थी। कोई दलित, वंचित और शोषित नहीं था। वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस को आप अगर पढ़ेंगे तो आपको मालूम होगा कि उस समय जाति व्यवस्था नहीं थी। हनुमानजी आर्य थे। इस बात को मैंने स्पष्ट किया है, उस समय आर्य थे और हनुमानजी उस आर्य जाति के महापुरुष थे।

इसके बाद तो जैसे अब राजनेताओं में भगवान की जाति और पहचान बताने के लिए होड़ मच गई है। सत्यपाल सिंह के बाद कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सत्येंद्र भारद्वाज ने भी इस बहस में हिस्सा ले लिया है| उन्होंने हनुमानजी को जनेऊधारी यानी ब्राह्मण बताया है। इतना ही नहीं सत्येंद्र भारद्वाज ने तो योगी आदित्यनाथ को हनुमान चालीसा पढ़ने की सलाह तक दे डाली। भारद्वाज ने हनुमानजी को ब्राह्मण बताने के पीछे तर्क दिया और कहा कि हनुमान चालीसा में साफ़ शब्दों में लिखा है कि ‘कांधे मूंज जनेऊ साजे’ इसका साफ़ और स्पष्ट मतलब है कि हनुमानजी जनेऊधारी ब्राह्मण थे।

हनुमानजी और सीताजी को लेकर कही ये बात

Talented View: खुद के गिरेबां में भी एक बार झांक लें

अब भगवान ही बताएंगे…

Share.