अलवर लिंचिंग: पुलिस ने माना अस्पताल ले जाने में हुई देरी

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अलवर मॉब लिंचिंग मामले में जहां एक ओर सियासत गरमा गई है वहीं दूसरी ओर पुलिस पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अलवर मॉब लिंचिंग मामले में रामगढ़ पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने के बाद आखिरकार उस पर गाज गिर ही गई। इस मामले में मारपीट के बाद मौत के शिकार हुए  रकबर खान को अस्पताल ले जाने में देरी के आरोप में एक सहायक पुलिस उप निरीक्षक मोहन सिंह को निलंबित और तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

इस बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सिंह यह स्वीकार करते दिख रहे हैं कि उनसे गलती हुई है और वह सज़ा के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि पुलिस थाने में पीड़ित को पीटा है।

वहीं इस मामले में अब यह भी एक बड़ा सवाल बन चुका है कि आखिर रकबर को मारा किसने? पूरी वारदात के दौरान मौजूद रहे लोगों का दावा है कि पुलिस की पिटाई में अकबर की मौत हुई। वहीं पुलिस ने लापरवाही की बात तो स्वीकार की है, लेकिन उसका दावा है कि भीड़ ने ही गो तस्कर होने के शक में अकबर की पिटाई की और बाद में उसकी मौत हो गई। इस बीच अकबर का एक फोटो सामने आया है, जिसमें वह पुलिस कस्टडी में है और वह बिल्कुल स्वस्थ दिख रहा है।

चश्मदीदों का दावा है कि अकबर की पुलिस पिटाई में मौत हुई है। कथित गोरक्षकों ने जब करीब 12:30 बजे रात को अकबर को पकड़ा था तो हल्की मारपीट के बाद पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस के हिरासत में जाने के बाद अकबर की मौत हुई है। पुलिस पर आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद उसकी पिटाई की गई। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि रकबर के शरीर की हड्डियां टूटी हुई थीं। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस की पिटाई से युवक की जान गई?

हालांकि इस अलवर मॉब लिंचिंग पूरे मामले में रामगढ़ पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने के बाद सोमवार को गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने हाईलेवल कमेटी गठित कर पुलिस की भूमिका की जांच कराने के निर्देश दिए थे,  जिसके बाद से कार्रवाई तेज़ हुई है।

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