पीएम मोदी बने ‘चैपियंस ऑफ द अर्थ’

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संयुक्त राष्ट्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों को सबसे बड़े पर्यावरण सम्मान से नवाज़ा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने दोनों ही नेताओं को ‘चैपियंस ऑफ द अर्थ’ अवॉर्ड से सम्मानित किया है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के नेतृत्व और 2002 तक भारत को एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक से मुक्त करवाने के संकल्प को लेकर सम्मान दिया गया है। इसके अलावा पांच अन्य व्यक्तियों और संगठनों को भी इससे सम्मानित किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों को पर्यावरण के लिए वैश्विक समझौते करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2022 तक प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म करने की शपथ के लिए सम्मानित किया है। इसके साथ केरल के कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सस्टेनेबल एनर्जी की दिशा में उत्कृष्ट पहल के लिए पुरस्कृत किया गया है। बता दें कि कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया का पहला पूर्ण सौर संचालित हवाई अड्डा है।

क्या है चैपियंस ऑफ द अर्थ ?

पर्यावरण के सबसे बड़े सम्मान चैपियंस ऑफ द अर्थ की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी। यह पुरस्कार पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्यों के लिए व्यक्ति और संगठनों को दिया जाता है। ये पुरस्कार पांच कैटेगरी में दिया जाता है। इसमें पॉलिसी लीडरशिप, इंटरप्रीन्योरियल, साइंस एंड इनोवेशन, इंस्पिरेशन एंड एक्शन और लाइफटाइम अचीवमेंट शामिल है।

इस साल पॉलिसी लीडरशिप केटैगरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जॉन कार्लिंग को लाइफटाइम अचीवमेंट, बियोंड मीट और इंपोसिबल फूड्स को संयुक्त रूप से साइंस एंड इनोवेशन कैटेगरी, चीन के जिनजिआंग ग्रीन रूरल रिवायवल प्रोग्राम को इंस्पिरेशन एंड एक्शन और कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इंटरप्रीन्योरियल विजन की कैटेगरी में सम्मानित किया गया है।

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