प्रधानमंत्री आवास योजना: 6 बरस से यात्री प्रतीक्षालय में गुजार रहे है जिन्दगी

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प्रधानमंत्री आवास योजना में लाखों लोगों को अपना घर देने के दावे की पोल कई बार खुल चुकी है. देश के पीएम नरेद्र मोदी अक्सर इस बात का ढोल पिटते हुए खुद की तारीफ करते सुने गए है कि इस योजना ने गरीबों को घर दिए है. बल्कि सच्चाई इसके ठीक उलट है. सच तो यह है कि इस योजना के बावजूद भूमिहीन परिवार के 6 सदस्यों को गांव वालों के रहमो करम के चलते 6 बरस से यात्री प्रतीक्षालय में जीवन गुजारना पड़ रहा है.

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यह हकीकत है महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लाक के गांव साई सरायपाली की . स्थानीय जनपद अधिकारी प्रदीप प्रधान के अनुसार उक्त परिवार का नाम पूर्व की सर्वे सूची में हो सकता है,उसे दिखाया जाएगा और नए सर्वे में इनका नाम प्रधान मंत्री आवास में जोड़ा जा सकता है.पिथौरा विकासखण्ड के दूरस्थ ग्राम साई सराईपाली निवासी जयंत निषाद और उनका 6 सदस्यों का परिवार ग्राम के ही यात्री प्रतीक्षालय में रह रहा है. ना तो स्वयं का मकान है और ना ही मकान बनाने के लिए जमीन इसे में यात्री प्रतीक्षालय 6 वर्षों से इनका घर है.

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ग्रामीणों ने इस परिवार के बारे में बताया कि इस परिवार को मात्र प्रधानमन्त्री आवास योजना से ही मकान मिल सकता है लेकिन मिला नही. पिछले 6 साल से इस परिवार को यही आस है कि सरकार इन्हें भी अपना घर देगी. गरीबी के चलते यह परिवार सरकारी दफ्तर की भागदौड़ और खर्चे नहीं कर सकता
पिथौरा ब्लाक मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर बसे ग्राम साईं सरायपाली मैं निवासरत जयंत निषाद पिता स्वर्गीय धरमसिंह निषाद है इनका स्वयं का कच्चा मकान था जो करीब 6 वर्षों पूर्व भारी बारिश के चलते ढह गया . ग्राम वासियों ने इस परिवार यात्री प्रतीक्षालय में रहने की इजाजत दे दी है.
जयंत निषाद(32), पत्नी जीरा बाई(30), मां मांग मोती(50 तथा तीन बच्चों रितु(10) , दीपांजलि(8) एवं पुत्र अंकित (6) मिलाकर छह लोग भूमिहीन होने के कारण मजदूरी कर जिन्दा है.

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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकासखण्ड में हजारों आवास अपात्रों को भी दिए जाने की खबरें हैं, भारी लेनदेन या किस्तों की गड़बड़ी की बात भी सामने आ चुकी है लेकिन जयंत निषाद का परिवार किसी को नही दिखा. ग्राम पंचायत के सचिव रवि लाल चौहान का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास वाली सूची में इस परिवार का नाम नहीं है जिसके कारण इस योजना का लाभ उसे अभी तक नहीं मिल सका है लिहाजा ग्राम पंचायत से पृथक से प्रस्ताव बनाकर जनपद कार्यालय को भेज दिया गया है किंतु स्वीकृति नहीं मिल पाई है.बारिश से मकान टूटने पर भी इस परिवार को कोई भी शासकीय मुआवजा नहीं मिला जबकि बारिश में कच्चे मकान के ढह जाने से राजस्व विभाग के द्वारा क्षतिपूर्ति के रूप में मुआवजा राशि का प्रावधान है.
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