पाक सैनिकों ने बीएसएफ के जवान के शरीर से की बर्बरता

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पाकिस्तान ने एक बार फिर कायरतापूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया है। जम्मू संभाग के सांबा जिले के रामगढ़ सब सेक्टर में पाकिस्तान रेंजर्स की गोलीबारी में शहीद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान नरेंद्र कुमार का पार्थिव शरीर भारत को सौंपने के बजाय उसके साथ बर्बरता की गई। घटना के बाद सुरक्षाबलों ने पूरी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तथा नियंत्रण रेखा पर हाई अलर्ट जारी कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हेड कांस्टेबल नरेंद्र कुमार के गले को चाकू से रेतने के साथ उनकी एक आंख को भी निकालने की कोशिश की गई है। शहीद कांस्टेबल नरेंद्र कुमार के शरीर में तीन गोलियों के निशान भी मिले हैं। कुमार का शव छह घंटे बाद भारत-पाक बाड़ के आगे मिल पाया क्योंकि पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों द्वारा सीमा पर संयम बनाए रखने और बीएसएफ के खोजी दलों पर गोलीबारी न होना सुनिश्चित करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

शहीद का पोस्टमार्टम हुआ

डॉक्टरों ने सीमा पर कंदराल पोस्ट पर जाकर शहीद का पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट के मुताबिक, शहीद कुमार को स्नाइपर गन से निशाना बनाया गया। उनके शरीर पर तीन गोलियों के निशान मिले। साथ ही गला रेतने, शरीर के अन्य हिस्सों पर घाव और एक आंख को क्षति पहुंचाने की पुष्टि हुई है।

शहीद को सलामी

शहीद नरेंद्र कुमार का पोस्टमार्टम करवाने के बाद उन्हें यूनिट स्तर पर सलामी दी गई। पहली बार हुआ, जब शहीद के पार्थिव शरीर को सलामी देने के लिए फ्रंटियर मुख्यालय पलौड़ा नहीं लाया गया।

कैसे शहीद हुए नरेंद्र कुमार

सब सेक्टर रामगढ़ के अग्रिम एसपी-वन क्षेत्र में बीएसएफ के चार जवान फेंसिंग के आगे अपने क्षेत्र में साफ-सफाई कर रहे थे, तभी पाकिस्तानी सैनियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। अन्य जवान सुरक्षित वापस आ गए, लेकिन गोली लगने के बाद हेड कांस्टेबल नरेंद्र कुमार झाड़ियों के बीच लापता हो गए। कांस्टेबल को तलाशने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स से भी सहयोग मांगा गया। पाकिस्तान ने क्षेत्र में पानी का हवाला देकर सहयोग से इनकार कर दिया। छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शहीद का पार्थिव शरीर तलाश लिया गया।

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