लाहौर के शादमान चौराहा का नाम होगा भगतसिंह चौराहा

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पाकिस्तान के लाहौर स्थित शादामान चौराहा का नाम अब बदलकर स्वतंत्रता सेनानी भगतसिंह के नाम पर होगा। पाकिस्तान की एक अदालत ने लाहौर जिला सरकार को निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है  कि जल्द इस संबंध में फैसला करें। गौरतलब है कि ब्रिटिश शासन के वक्त स्वतंत्रता सेनानी सरदार भगतसिंह और उनके साथियों राजगुरु और सुखदेव को पूर्ववर्ती लाहौर जेल में 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी। उसी स्थान पर शादामान चौराहा बना हुआ है।

लाहौर हाईकोर्ट के न्यायाधीश शाहिद जमील खान ने भगतसिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष इम्तियाज राशिद कुरैशी की याचिका पर सुनवाई करते हुए लाहौर के उपायुक्त को आदेश दिया कि वह कानून के दायरे में रहते हुए शादमान चौराहा का नाम बदलकर भगतसिंह के नाम पर रखने के संबंध में फैसला करे।

बता दें कि 17 जनवरी 2018 को लाहौर में शादमान चौक का नामकरण शहीद भगतसिंह के नाम पर करने और उनका बुत वहां लगाने के लिए पंजाब सरकार, लाहौर के मुख्य आयुक्त और मेयर को फाउंडेशन के अध्यक्ष इम्तियाज राशिद कुरैशी ने मांग-पत्र दिया था। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने इस मामले को लेकर लाहौर हाईकोर्ट में रिट पीटीशन डाल दी थी। इम्तियाज कुरैशी का कहना है कि शहीद भगतसिंह उपमहाद्वीप के एक महान क्रांतिकारी थे और पूरी दुनिया उनके नाम को जानती है। यहां तक कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने भी उनकी प्रशंसा की थी। जिन्ना ने कहा था कि उपमहाद्वीप में भगतसिंह जैसे बहादुर आदमी का जन्म नहीं हुआ था।

भगत सिंह के जीवन पर एक नज़र

भगतसिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा में (अब पाकिस्तान में) हुआ था। उनका पैतृक गांव खट्कड़कलां है, जो पंजाब में है। उनके पिता नाम नाम किशनसिंह और माता का नाम विद्यावती था। भगतसिंह का परिवार एक आर्य समाजी सिख परिवार था। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगतसिंह के मन पर बड़ा गहरा प्रभाव डाला। लाहौर षडयंत्र मामले में भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सज़ा सुनाई गई और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास दिया गया। भगतसिंह को 23 मार्च 1931 को शाम सात बजे सुखदेव और राजगुरु के साथ फांसी पर लटका दिया गया।

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