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यूपीए सरकार में बैंकों ने बांटे अंधाधुंध कर्ज – जेटली

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वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यूपीए सरकार के वक्त सरकारी बैंकों की ओर से बांटे गए अंधाधुंध कर्ज की वजह से आज एनपीए की समस्या खड़ी हुई है। बैंकर्स लॉबी आईबीए की वार्षिक आम बैठक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए वित्तमंत्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि बैंकों ने उस वक्त अव्यावहारिक परियोजनाओं को ऋण दिया, जिस कारण बैकिंग प्रणाली में एनपीए 12 प्रतिशत पहुंच गया। जेटली ने कहा कि इसी वजह से 2012-13 और 2013-14 में बड़ी आर्थिक समस्याएं खड़ी हुईं।

भविष्य में बुरे परिणाम

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि, यदि हम हर वर्ष बैंक ऋण को 31 या 28 प्रतिशत बढ़ाकर आर्थिक वृद्धि बढ़ाने का गोलमाल कर रहे हैं तो निश्चित ही भविष्य में इसके बुरे परिणाम दिखने को मिलेंगे। उन्होंने एनपीए की समस्या के लिए बैंकों को दोषी ठहराया। जेटली ने कहा कि यूपीए सरकार में कमजोर परियोजनाओं को ऋण दिए गए, जिसके चलते उन ऋण खातों में समस्या पैदा हुई और बैंकों ने उसको ऩजरअंदाज किया।

ढुलमुल बैंकिंग

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बैकिंग को ढुलमुल करार दिया। उन्होंने कहा कि इसी तरह की रणनीति के चलते ज़रूरत से ज्यादा क्षमताओं का सृजन हुआ और हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए जब कर्ज से स्थापित परियोजनाएं ऋण की किस्त चुकाने की हालत में नहीं थी। उन्होंने कहा कि इनमें कुछ परियोजना में घोटाला भी हुआ। जेटली ने कहा कि सबसे बढ़ी गलती यह हुई कि हमने ऋणों को नया करना शुरू कर दिया और इसका परिणाम है कि अब हमें उनकी वसूली के लिए सही रास्ता नहीं मिल रहा है।

आर्थिक वृद्धि 10.8 प्रतिशत

गौरतलब है कि 17 अगस्त को राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की समिति द्वारा वास्तविक क्षेत्र की वृद्धि दर पर जारी रिपोर्ट में आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित नई जीडीपी श्रृंख्ला के अनुरूप की गई। पिछले साल की कड़ियों में 2006-07 में आर्थिक वृद्धि 10.8 प्रतिशत दिखाई गई है।  रिपोर्ट के अनुसार मनमोहन सरकार के 10 वर्ष के कार्यकाल में औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि 8.1प्रतिशत रही, वहीं मोदी सरकार के 4 वर्ष में यह आंकड़ा 7.3 प्रतिशत है।

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