अब मुख्यमंत्री को मिला संतों का साथ

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प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चौहान अब भाजपा की नीति का निर्वहन करते हुए संत राजनीति की राह पर निकल चुके हैं| संतों द्वारा किए जाने वाले विरोध से बचने के लिए शिवराजसिंह चौहान ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया और राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया| शिवराजसिंह चौहान ने इंदौर के तीन बड़े संत महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और अखिल भारतीय सर्वब्राह्मण समाज के अध्यक्ष योगेन्द्र महंत को राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया| इसके अलावा संत हरिहरानंदजी और संत नर्मदानंद को भी राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया|

प्रदेश की राजनीति में अचानक संतों को दिए गए इस राजपद को लेकर अब कई तरह के सवाल भी उठने लगे हैं| आखिर शिवराजसिंह चौहान को संतों को साधने की क्या जरूरत आन पड़ी| जो संत सरकार का विरोध पहले कर चुके हैं या करने की तैयारी में भी थे, उन्हें इतनी बड़ी पदवी देना कहीं न कहीं सरकार की मंशा और चुनाव आधारित राजनीति की ओर भी इशारा करता है|

राज्य सरकार की नर्मदा यात्रा के विरोध में 1 से 15 अप्रैल के बीच आंदोलन की चेतावनी देने वाले कंप्यूटर बाबा और पंडित योगेंद्र महंत को राज्यमंत्री का दर्जा दिया जाना यह साफ करता है कि शिवराजसिंह चौहान आगामी चुनाव में संतों के कोप से प्रभावित नहीं होना चाहते हैं| वहीं राष्ट्रीय संत भय्यू महाराज को राज्यमंत्री बनाकर शिवराजसिंह कहीं न कहीं राष्ट्रीय नेताओं से भी अपने संबंध मजबूत करना कहते हैं| यदि चुनाव के समय भाजपा के पास किसी तरह का नकारात्मक फीडबैक शिवराजसिंह सरकार के बारे में जाता है या भाजपा और संघ शिवराज को लेकर किसी तरह का बड़ा कदम उठाते हैं तो ऐसे में भय्यू महाराज शिवराजसिंह चौहान के खेवनहार बन सकते हैं|

ऐसे में अब देखना होगा कि संतों का यह साथ शिवराज सरकार को कितना आगे ले जाता है और आगामी विधानसभा चुनाव में संतों का यह आशीर्वाद सरकार के लिए कितना फलीभूत होता है|

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