अब आकाशवाणी पर गिरी #मीटू की गाज

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देश के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाएं #मीटू मुहिम के तहत अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के अनुभव साझा कर रही हैं। इस कड़ी में ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) का नाम भी जुड़ गया है। ऑल इंडिया रेडियो में भी कई यौन शोषण के मामले सामने आए हैं। आकाशवाणी के देशभर में स्थित कई स्टेशनों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने अपने साथ यौन दुर्व्यवहार की शिकायत की है।

इस संबंध में ऑल इंडिया रेडियो कैजुअल अनाउंसर एंड कम्पेयर्स यूनियन (एआईसीएसीयू) ने इस संबंध में मेनका गांधी को एक चिट्ठी लिखी थी। जिसके बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सूचना एवं प्रसरण मंत्रालय से पूरे मामले की जांच की मांग की है। मेनका को लिखे अपने पत्र में एआईसीएसीयू ने बताया था कि कैजुअल अनाउंसर या रेडियो जॉकी खुद के शोषण के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा पातीं, क्योंकि नौकरी जाने का डर हमेशा बना रहता है।

मेनका गांधी को लिखे अपने पत्र में एआईसीएसीयू ने बताया था कि कैजुअल अनाउंसर या रेडियो जॉकी खुद के शोषण के खिलाफ आवाज नहीं उठा पातीं, क्योंकि नौकरी जाने का डर हमेशा बना रहता है। जिसने भी यौन शोषण जैसी शिकायत की उसे काम देना बंद कर दिया जाता है और उसका साथ देने वालों पर भी कार्रवाई होती है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के शहडोल के आकाशवाणी केंद्र में 9 महिला कर्मचारियों ने केंद्र के असिस्टेंट डायरेक्टर रत्नाकर भारती के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत सार्वजनिक की, जिसके बाद इन सभी महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार भारती इस वक्त नई दिल्ली में आकाशवाणी हेडक्वॉटर में कार्यरत हैं। एक वर्ष पहले शहडोल आकाशवाणी की इंटरनल कम्प्लेंट्स कमेटी ने उन्हें यौन उत्पीड़न का दोषी माना था। इन महिलाओं के नाम और आरोप लगाने के समय के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

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