संत नर्मदानंद ने छोड़ा राज्यमंत्री का दर्जा

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सरकार द्वारा राज्यमंत्री  के दर्जे से नवाजे गए संत नर्मदानंद ने इस पद को छोड़ दिया है। एक निजी कार्यक्रम में भोपाल आए संत नर्मदानंद ने कहा कि मैं राज्यमंत्री का दर्जा तत्काल छोड़ रहा हूं। हालांकि संत नर्मदानंद ने अभी तक सरकार को ये लिखकर नहीं दिया है कि वे राज्यमंत्री का दर्जा छोड़ने वाले हैं। गौरतलब है कि नर्मदानंद से पहले भय्यू महाराज भी कह चुके हैं कि वे राज्यमंत्री का दर्जा नहीं लेंगे।

नर्मदानंद विवादों से नाता

आपको बता दें कि संत नर्मदानंद कई विवादों में भी रहे हैं। दरअसल, संत नर्मदानंद नेत्रहीन होने का दावा कर वर्षों से रेलवे के रियायती पास पर यात्रा कर रहे थे। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद बाबा ने कहा कि नर्मदा किनारे नंगे पांव चलने से उनकी आंखों की रोशनी लौट आई थी।

शिवराज के विरोध में होने वाली थी यात्रा

कंप्यूटर बाबा 1 अप्रैल से 15 मई तक प्रदेश के प्रत्येक जिले में नर्मदा घोटाला रथयात्रा निकालकर नर्मदा नदी की बदहाल स्थिति को लोगों के सामने लाने वाले थे। योगेंद्र महंत इसके संयोजक थे। कंप्यूटर बाबा ने नर्मदा  किनारे छह करोड़ पेड़ लगाने के सरकारी दावे पर सवाल उठाए थे, वे नर्मदा में जारी अवैध उत्खनन के मुद्दे को भी उठाने वाले थे। अब उनका विचार बदल गया है।

उन्होंने कहा है कि सरकार ने साधु-संतों के समिति बना दी है। अब यात्रा का कोई  औचित्य नहीं है। वहीं मध्यप्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी किया है कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में वृक्षारोपण,जल संरक्षण तथा स्वच्छता के विषयों पर जनजागरूकता का अभियान निरंतर चलाने के लिए विशेष समिति गठित की गई है। इस समिति के पांच विशेष सदस्यों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। वृक्षारोपण, जल सरंक्षण और स्वच्छता, तीनों ही कल्याणकारी कार्य है और संतों का काम ही परमार्थ करना है। फिर इसके लिए संतों को सरकारी आदेश से बांधने की क्या  जरूरत थी।

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