प्रेस कॉन्फ्रेंस पर कोई खेद नहीं – जस्टिस कुरियन

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सुप्रीम कोर्ट के कार्य को लेकर 12 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चार न्यायाधीशों में शामिल न्यायाधीश कुरियन जोसेफ गुरुवार को रिटायर हो गए। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कोई खेद नहीं है। कुरियन ने कहा कि एक वजह से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई थी। जिस संकट से निपटने को लेकर कॉन्फ्रेंस की गई थी, वह अभी पूरी तरह से निपटा नहीं है, परंतु प्रोसेस चल रही है। इसमें अभी समय लगेगा।

उन्होंने कहा कि ये सिर्फ रोस्टर की बात नहीं है। दिनभर के कामकाज के तौर-तरीके को लेकर भी सवाल थे। सिस्टम और प्रैक्टिस को लेकर हमारी आपत्ति थी। अब उसे दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। कुरियन ने कहा कि जजों पर कोई भी राजनीतिक दबाव नहीं होता। मेरे साथ कभी ऐसा नहीं हुआ है। मुझे लगता है कि ऐसा नहीं है। सरकार का मुकदमों को लेकर दबाव नहीं रहता, परंतु जजों की बहाली और उनमें देरी में ज़रूर दखल रहता है।

बता दें कि जस्टिस जोसेफ सुप्रीम कोर्ट के तीसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश थे। उन्होंने केरल हाईकोर्ट से 1979 से अपने करियर की शुरुआत की थी। वर्ष 2000 में वे केरल हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए। 8 मार्च 2013 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नियुक्त किया गया। इससे पहले उन्होंने केरल हाईकोर्ट और हिमाचल हाईकोर्ट में अपनी सेवाएं दीं। देश की उच्चम न्यायालय में पिछले पांच वर्षों के दौरान जस्टिस जोसेफ ने कई अहम मामलों में फैसले दिए। इनमें ट्रिपल तलाक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व आयोग खास रहे।

वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के नेताओं ने जस्टिस कुरियन को सर्वाधिक लोकप्रिय जजों में से एक खुशनुमा मुस्कुराहट वाला जज बताया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से अनुरोध किया कि उनकी जगह पर उन जैसी मुस्कान वाला न्यायाधीश ही लाया जाए।

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