भारत अभी भी कोरोना को हल्के में ले रहा है

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दुनियाभर के तमाम देशों में तबाही मचाने के बाद अब कोरोना वायरस भारत (Coronavirus In India) की ओर अपने कदम बढ़ा रहा है। ऐसे में इस भयावह महामारी का सामना करने के लिए भारत कितना तैयार है। क्या भारत के पास वे तमाम सारे जरुरी संसाधन हैं जो कोरोना से निपटने के लिए देश के पास होने चाहिए। क्या भारत अपने लोगों की सुरक्षा के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी कर रहा है। यह सवाल भी अब लोगों के जहन में उठने लगे हैं।

क्या कहता है WHO-

विश्व स्वास्थ्य संगठन पूरी दुनिया में कोरोना को लेकर जागरुकता फैला रहा है। इसके अलावा WHO की एक ही अपील लोगों से है कि वे अधिक से अधिक बार अपने हाथ धोएं। लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग यानि दूरी बनाकर रखें। थोड़ी बहुत सर्दी और बुखार होने पर भी डाॅक्टर से चेकअप जरुर करवाएं।

कनिका कपूर ने भी लगाए थे आरोप-

भारत में कोरोना से प्रभावित सिंगर कनिका कपूर ने भी देश में स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर कई आरोप लगाए थे। एक निजी समाचार चैनल से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने टेस्ट के लिए कम से कम 20 फोन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लगाने पड़े थे। वहीं उनकी जांच में भी विभाग ने दो दिन का समय लगाया था। हल्का बुखार होने पर उन्हें केवल आराम करने की सलाह दी गई थी। वहीं उनकी ननद को भी हल्की सर्दी बुखार होने पर भी उनकी जांच नहीं हो पाई है।

विश्व मीडिया क्या कहता है-

वहीं कोरोना को लेकर विश्व के दूसरे मीडिया ने भी भारत की तैयारियों को नाकाफी बताया है। विश्व के कई ऐसे मीडिया हाउस हैं जिनका दावा है कि दूसरी स्टेज तक पहुंचने तक भी भारत कोरोना को हल्के में ले रहा है। चीन और दूसरे देशों के मुकाबले यहां ऐसी कोई तैयारी नहीं है जिसस कोरोना के खतरे को कम किया जा सके।

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बीबीसी के अनुसार-

अभी तक दुनिया के 159 देशों के ढाई लाख से भी ज्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, वहीं 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। लेकिन दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले राष्ट्र भारत में अब तक 182 मामले ही रिपोर्ट हुए हैं। जिनमें से केवल 4 मौत हुई है।

सैंपलिंग में कोताही-

इसका कारण है भारत में सैंपल लेने में कोताही बरती जाना या सैंपलिंग की पूरी व्यवस्था नहीं होना। भारत ने अब तक केवल 14175 सैंपल ही टेस्ट किये हैं जो कि देश के विभिन्न राज्यों की 72 लैब में जांचे गए हैं। लेकिन टेस्टिंग का यह आंकड़ा काफी ज्यादा कम है। इसका अर्थ यह हुआ कि अगर सही टेस्टिंग नहीं हो रही है तो कोरोना से प्रभावित कई लोग अभी भी खुले में इस वायरस को लेकर घूम रहे होंगे। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि इतनी अधिक जनसंख्या वाले देश में इतनी कम जांच आखिर क्यों हो रही है। 01 से 15 मार्च के बीच सवास्थ्य विभाग ने देश में केवल 826 सैंपल की जांच की, जो कोरोना से निगेटिव आए लेकिन इस दौरान किसी भी अस्पताल में इन मरीजों के स्वास्थ्य की जांच और उन्हें भर्ती नहीं किया गया।

स्वास्थ्य विभाग की तैयारी-

इधर स्वस्थ्य विभाग द्वारा कोरोना के लक्षण वाले मरीजों को भी सर्दी-खांसी की दवा ही दी जा रही है। ICMR के डायरेक्टर बलराम भार्गव के अनुसार- इसे अभी समाज में फैलने से रोकना हमारे लिए ज्यादा जरुरी है। क्योंकि भारत में यह प्री-मेच्योर अवस्था में है और इसके नाम पर केवल डर फैलाया जा रहा है।

समाज में फैलने से रोकना बड़ी चुनौती-

देश में सभी की जांच करना संभव नहीं है लेकिन बावजूद इसके विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कोरोना की जांच को लेकर स्वास्थ्य तंत्र कमजोर है। हम चीन और कोरिया की तरह अस्पताल भी नहीं बना सकते लेकिन हमें लोगों की जांच कर इसे समाज में फैलने से रोकना ही होगा। इससे पहले भारत ने पोलियो, चेचक, एच 01 एन 01, और एड्स जैसी बीमारियों को भी समाज में फैलने से रोका है। इसके लिए निजी सेक्टर से पहले हमारी सरकार ने जागते हुए कदम उठाया था और इस बार भी ऐसी ही जरुरत है।

क्या है हमारा स्वास्थ्य पर खर्च-

भारत अपनी जीडीपी का 1.5 प्रतिशत केवल स्वस्थ्य पर खर्च करता है और सरकार ने इसे रोकने के लिए स्कूल, मॉल्स, और सार्वजनिक स्थानों को बंद करने की अपील भी की है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

क्या इंतजाम और चाहिए-

भारत में कम से कम 50 और लैब्स की जरुरत है जो 90 सैंपल रोजाना जांच सके। ताकि 8000 सैंपल रोज के जांचे जा सकें। वहीं सरकार यदि चाहे तो प्राइवेट लैब्स को भी इसके लिए अपने साथ जोड़ सकती है। उन्हें किट और जरुरी सामग्री मुहैया करवा सकती है ताकि ज्यादा से ज्यादा जांच हो सके और जो संदिग्ध हैं उनकी रिपोर्ट भी जल्दी आ सकें। भारत कम से कम 01 लाख किट के लिए WHO से निवेदन करें और यदि जरुरत हो तो और भी मंगवाए।

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भारत में यह है डाॅक्टरों का अनुपात-

भारत में 10 हजार लोगों के लिए केवल एक डॉक्टर उपलब्ध है। जबकि इटली में 41 और कोरिया में 71 डॉक्टर प्रति 10 हजार की दर से काम करते हैं। वहीं यदि अस्पतालों की बात की जाए तो 55 हजार लोगों पर एक अस्पताल है जो कि राज्य सरकार द्वारा चलाया जाता है, वह मौजूद है। भारत में जांच नहीं करवाने की आदत लोगों में भी है और वह भी इसे हल्के में ही लेते हैं। जैसे बुखार आने या हल्की सर्दी खांसी होने पर यहां के लोग खुद भी अस्पताल नहीं जाते हैं। अस्पताल में इंटेंसिव केयर, अच्छे बेड्स और संक्रमण मुक्त माहौल की भी कमी है। कोरोना ने इटली में 03 हफ्तों में और स्पेन में 02 हफ्तों में बहुत तेजी से लोगों को प्रभावित किया है और अब भारत को लेकर भी इसका खतरा बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं अगर यह छोटे कस्बों और गांव तक पहुंच जाता है तो यह और भी खतरनाक होगा।

आम लोगों से अपील-

आम लोगों से हमारी भी यही अपील है कि इस स्थिती में घबराने की बजाय वे धैर्य से काम लें। यदि कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता भी है तो सेल्फ क्वारेंटीन करते हुए अपने घर में ही रहें। किसी भी स्थित में अफवाह ना फैलाएं और मिलकर कोरोना से जंग में देश का सहयोग करें।

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Rahul tiwari / Prabhat

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