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क्यों हैं सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक ?

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केरल (Kerala ) की राजधानी तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram ) से 175 किलोमीटर दूर पहाड़ियों के बीच स्थित है सबरीमाला मंदिर जो अभी भी विवादों में ही बना हुआ है। 800 साल पुरानी प्रथा के विरोध में देश की शीर्ष अदालत आज अपने ही फैसले पर पुनर्विचार करने वाली है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme court)  ने 28 सितंबर 2018 को एक आदेश दिया था, जिसके बाद केरल के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) के अय्यपा भक्तों (Ayyapa devotees) ने भारी रोष प्रकट किया था। कोर्ट ने कहा था कि हर उम्र की लड़कियों और महिलाओं को सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Verdict) में जाने का हक है। कोई भी उनसे उनका अधिकार नहीं छिन सकते हैं। कोर्ट के आदेश के बाद पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी और काफी हंगामा हुआ था। क्या आप जानते हैं कि इस हंगामे की मुख्य वजह क्या है ? आखिर क्यों महिलाओं को मंदिर में जाने से रोका जाता है?

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क्यो खास है मंदिर ?

केरल के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala temple of Kerala ) में 800 साल पुरानी प्रथा के अनुसार रजस्वला स्त्री मंदिर में नहीं जा सकती है। यानि कि महिलाओं को भगवान आयप्पा (Lord Ayyappa ) के दर्शन करने का अधिकार नहीं है, यदि उनकी उम्र 15 से 50 साल के बीच कि हुई तो। सिर्फ छोटी बच्चियां और बूढ़ी महिलाएं ही भगवान के दर्शन कर सकती है। भगवान आयप्पा के दर्शन करने के लिए मंदिर में हर साल नवम्बर से जनवरी तक, श्रद्धालु अयप्पा भगवान के दर्शन के लिए भक्त उमड़ पड़ते हैं। ऐसा इसीलिए क्योंकि पूरे साल यह मंदिर आम भक्तों के लिए बंद रहता है (Sabarimala Verdict)। अयप्पा भक्तों के लिए मकर संक्रांति का दिन बहुत खास माना जाता है और इसीलिए उस दिन यहां सबसे ज़्यादा भक्त पहुंचते हैं।

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कौन थे भगवान आयप्पा ? क्यों  लगा महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध

पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान अयप्पा भगवान शिव और मोहिनी (विष्णु अवतार ) के पुत्र हैं। इनका एक नाम हरिहरपुत्र भी है। हरिहरपुत्र नाम यानी विष्णु और हर के नामों को मिलकर बना नाम। इनके अलावा भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है। लोगों का कहना है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थी, इसीलिए महिलाएं उस मंदिर में प्रदेश नहीं कर सकती है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 18 पावन सीढ़ियों को पार करना पड़ता है, जिनके अलग-अलग अर्थ भी बताए गए हैं। ऐसा माना जाता है कि पहली पांच सीढ़ी मनुष्य की पांच इन्द्रियों को बताती है। इसके बाद वाली 8 सीढ़ियां मानवीय भावनाओं को बताती है। इसके बाद की तीन सीढियों के लिए कहा जाता है कि ये मानवीय गुण और अंतिम की दो सीढ़ियों को ज्ञान और अज्ञान का प्रतीक माना जाता है। यह भी कहते हैं कि इन पवित्र सीढ़ियों पर महिलाएं नहीं जा सकती। यदि जाती है तो ये अपवित्र हो जाएगी।

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     – Ranjita Pathare 

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