आख़िर कौन है प्रशांत किशोर जिनसे हार गए मोदी-शाह?

0

वर्तमान भारतीय राजनीति (Who Is Prashant KIshore) का चाणक्य जिसके साथ हुआ उसको सिंहासन तक पहुंचाया। दिल्ली (Delhi Assembly Elections 2020) के चुनावी नतीजे आ चुके हैं। सभी एक्ज़िट पोल (Delhi Exit Poll)  अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और उनकी पार्टी की जीत के दावे कर रहे हैं। अगर ऐसा हुआ तो फिर प्रशांत किशोर का बिहार वाला फ़ार्मूला हिट हो जाएगा। इसी फ़ार्मूले के दम पर लालू यादव (Lalu Prasad Yadav) और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जोड़ी ने बीजेपी को धूल चटा दी थी। प्रशांत किशोर के इस फ़ार्मूले के कारण सांप्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं हो पाया। आरजेडी और जेडीयू के मुस्लिम नेताओं को प्रचार से दूर रखा गया था। बीजेपी के कई नेता भारत पाकिस्तान और हिंदू मुसलमान जैसे मुद्दों के गरमाते रहे, लेकिन महागठबंधन सामाजिक न्याय के एजेंडे से नहीं हटी। दिल्ली के चुनाव में बीजेपी शाहीनबाग के इर्द गिर्द मंडराती रही। अमित शाह से लेकर पार्टी के सभी छोटे बड़े नेताओं ने राष्ट्रवाद का ढोल बजाया। सब इसी कोशिश में जुटे रहे दिल्ली का चुनाव हिंदू बनाम मुसलमान हो जाए। शुरूआत अमित शाह (Amit Shah) ने ईवीएम (EVM) का बटन दबा कर शाहीनबाग (Shaheen Bagh) में करंट लगाने की अपील से की। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने देश के ग़द्दारों को गोली मरवाने के नारे लगवाए। पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi)  ने शाहीनबाग (Shaheen Bagh) को एक प्रयोग बता दिया। सांसद प्रवेश वर्मा शाहीनबाग (Pravesh Verma Shaheenbagh) के प्रदर्शनकारियों के नाम पर हिंदुओं को खूब डराया लेकिन बीजेपी (BJP) के इस गेम को केजरीवाल (Arvind Kejriwal) समझ गए।

Pakistan को Arvind Kejriwal का तमाचा

बीजेपी (BJP) ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के लिए जाल बिछाया, दाना डाला लेकिन वे फंसे नहीं। फंसते भी कैसे ? केजरीवाल (Arvind Kejriwal)  के पास प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) जैसा रणनीतिकार जो था।  जी हां वहीं प्रशांत (Who Is Prashant KIshore), जो बिहार में बीजेपी के इस ध्रुवीकरण के जाल को तार-तार कर चुके हैं। आपको बता दें की प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने दिल्ली के चुनाव में वही सब कुछ किया जो 5 साल पहले वे बिहार में कर चुके हैं। बीजेपी शाहीनबाग चिल्लाती रही लेकिन आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने इस नाम से ही तौबा कर ली। तय हुआ कि सब शाहीनबाग से दूर रहेंगे। न कोई वहां जाएगा, न उस पर चर्चा करेगा, ऐसा ही हुआ। केजरीवाल की पार्टी के नेता अपने मुद्दों पर ही डटे रहे। फ़्री बिजली, पानी, मोहल्ला क्लिनिक और स्कूल की माला जपते रहे। एक बार तो लगा कि आम आदमी फंसने लगी है। ये बात तब की है जब डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (Deputy CM Manish Sisodia) ने कहा कि मैं शाहीनबाग (Shaheen Bagh) के साथ हूं। बीजेपी के नेता इस बयान को लेकर उड़ गए। ये कहा जाने लगा कि शाहीनबाग में केजरीवाल के लोग बिरयानी खिला रहे हैं। बीजेपी की काट के लिए प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने रणनीति बदल ली। चुनाव प्रचार में बजरंग बली की एंट्री हो गई। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) हनुमान चालीसा पढ़ने लगे। बजरंगबली के मंदिर जाने लगे। बीजेपी (BJP) इस जुगाड़ में थी कि केजरीवाल को हिंदू विरोधी साबित कर दिया जाए। (Who Is Prashant KIshore) अजान के समय भाषण रोक देने वाले उनके पुराने वीडियो सोशल मीडिया में वायरल कराए गए। लेकिन प्रशांत किशोर ने कुछ और ही तय कर रखा था। केजरीवाल उसी राह पर चलते रहे।

निर्भया की मां आशा देवी होगी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ उम्मीदवार!

Who Is Prashant KIshore Who Won The Election To Arvind Kejriwal

आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के नेताओं ने बीजेपी (BJP) के हिंदुत्व एजेंडे (RJD) पर रिएक्ट ही नहीं किया। क्या इस बार आपने केजरीवाल या उनके किसी नेता को किसी मस्जिद या दरगाह जाते देखा ? (Who Is Prashant KIshore) ऐसा ही बिहार में भी हुआ था। जेडीयू (JDU) और आरजेडी (RJD)  ने अपने सभी मुस्लिम नेताओं के बयान देने पर रोक लगा दी थी। अमानतुल्लाह और शोएब इक़बाल (Amanatullah and Shoaib Iqbal) जैसे आप के नेता ख़ामोश रहे। लाइमलाइट से दूर रहे। बिहार चुनाव में तो प्रशांत किशोर मंच पर मुस्लिम नेताओं को नहीं बैठने देते थे। लालू ने ये कह कर एक मुस्लिम सासंद को नीचे उतार दिया था कि तुम्हारी बिरादरी का असली नेता मैं हूं। तुम मंच पर गए तो कई हिंदू वोट कट जायेंगे। ये रणनीति और आयडिया प्रशांत किशोर का था। वे बिहार में सफल रहे। और अब दिल्ली में भी सफल होते हुए  नजर आ रहे है। आपको बता दें कि प्रशांत किशोर ने इससे पहले पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार बनवाने में भी अहम् भूमिका  निभाई थी।  प्रशांत किशोर ने उस समय तृणमूल कांग्रेस (Congress) के जमीनी प्रचार अभियान की दिशा ही बदल दी थी। पीपुल टू पीपुल कॉन्टैक्ट के अभियान से लेकर प्रशांत किशोर ने ममता बनर्जी की छवि भी उस समय काफी सुधारी थी। प्रशांत किशोर (Who Is Prashant KIshore) की टीम ममता बनर्जी को मीडिया में बयान देने से लेकर हर मोड़ पर सलाह दी थी जिसका परिणाम भी सफल रहा था।     अब आप सोच रहे होंगे कि ये प्रशांत किशोर है कौन जो पूरा परिणाम बदलने का हुनर रखते है। तो आपको बता दें कि प्रशांत किशोर एक भारतीय राजनीतिक रणनीतिकार और राजनीतिज्ञ हैं, जो जनता दल (यूनाइटेड) के हैं। आरंभ में सार्वजनिक स्वास्थ्य में प्रशिक्षित, किशोर ने भारतीय राजनीति में प्रवेश करने से पहले आठ वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र के लिए काम किया है। प्रशांत किशोर (Who Is Prashant KIshore) ने भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों के लिए चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम किया है और अब आप के लिए कर रही है । किशोर (Prashant Kishore) का पहला प्रमुख राजनीतिक अभियान 2011 में नरेंद्र मोदी की मदद करने के लिए था, तब गुजरात के मुख्यमंत्री 2012 के गुजरात विधानसभा चुनावों (Gujrat elections) में तीसरी बार सीएम कार्यालय के लिए फिर से निर्वाचित हुए। उसके बाद उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP)  को पूर्ण बहुमत से जीतने में मदद की थी।

फेसबुक पर केजरीवाल का खर्च सुन मोदीजी के भी होश उड़ जाएंगे

Prabhat Jain

Share.