जानिये आखिर क्या है क्यूरेटिव पिटीशन क्या ये निर्भया के दोषियों को फांसी से बचा लेगी

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Curetive petition शब्द की उत्पत्ति Cure शब्द से हुई है जिसका मतलब होता है उपचार करना क्यूरेटिव पिटीशन (What Is Curative Petition) तब दाखिल किया जाता है जब किसी मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पुनर्विचार याचिका ख़ारिज कर दी गई हो। इसके जरिये वह चीफ जस्टिस या राष्ट्रपति (Chief Justice or President) के पास गुहार लगा सकता है क्यूरेटिव पिटीशन (Curetive petition) किसी भी मामले में अभियोग की अंतिम कड़ी होती है इसमें फैसला आने के बाद अपील करने वाले व्यक्ति के लिए आगे के सभी रास्ते बंद हो जाते है क्यूरेटिव पिटीशन (Curetive petition) को न्यायिक व्यवस्था में इंसाफ पाने के आखिरी उपाय के तौर पर जाना जाता है. ये आखिरी उपाय है, जिसके जरिए कोई अनसुनी रह गई बात या तथ्य को कोर्ट सुनती है. ये सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई व्यवस्था है, जो उसकी ही शक्तियों के खिलाफ काम करती है.

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क्यूरेटिव पिटीशन (Curetive petition) और रिव्यू पिटीशन में अंतर-

आपको बात दें की क्यूरेटिव पिटीशन (What Is Curative Petition) और रिव्यू पिटीशन में अंतर होता है. रिव्यू पिटीशन (Review petition) में कोर्ट अपने पूरे फैसले पर पुनर्विचार करती है, जबकि क्यूरेटिव पिटीशन (Curetive petition) में फैसले के कुछ बिंदुओं पर विचार किया जाता है. कोर्ट को अगर लगता है कि किसी मुद्दे या किसी बिंदु पर दोबारा से विचार करने की जरूरत है तो क्यूरेटिव पिटीशन (Curetive petition) के दौरान उस पर विचार होता है. सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन (Curetive petition) के दौरान अगर सुनवाई होती है और फांसी के दिन तक इस पर फैसला नहीं आता है तो फांसी की तारीख टल सकती है.

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What Is Curative Petition | Can Nirbhaya Convicts Get Relief?कब दाखिल कर सकते है क्यूरेटिव पिटीशन-

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के 30 दिन के भीतर रिव्यू पिटीशन (Review petition) दाखिल की जा सकती है। लेकिन क्यूरेटिव पिटीशन (What Is Curative Petition) के लिए समयसीमा नहीं है। इसे कोई सीनियर एडवोकेट ही दाखिल कर सकता है। याचिका सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के तीन सबसे वरिष्ठ जजों की बेंच के पास जाती है। यदि उन्हें लगता है कि याचिका में उठाए गए मुद्दे वाजिब हैं तो वह सुनवाई के लिए उसे स्वीकार कर सकते हैं। यह याचिका उन जजों को भी देनी होती है, जिन्होंने रिव्यू पिटीशन (Review petition) पर फैसला सुनाया था।

आपको यह आज हम इसलिए बता रहे है क्योकि देशभर को हिलाकर रख देने वाले निर्भया गैंगरेप मर्डर केस (Nirbhaya Gangrape Murder case) में आज सुप्रीम कोर्ट में इसके दो दोषियों विनय और मुकेश कुमार की क्यूरेटिव पिटीशन (What Is Curative Petition) पर सुनवाई होगी. निर्भया केस में चारों दोषियों का डेथ वॉरन्ट पहले ही जारी हो चुका है. इसके बाद दो दोषियों विनय और मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन डाली है. इनके पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट के जज एनवी रमना, अरुण मिश्रा, आरएफ नरीमन, आर भानुमति और अशोक भूषण की बेंच सुनवाई करेगी.

What Is Curative Petition | Can Nirbhaya Convicts Get Relief?क्यूरेटिव पिटीशन (What Is Curative Petition) में पूरे फैसले पर चर्चा नहीं होती है. इसमें सिर्फ कुछ बिन्दुओं पर दोबारा से विचार किया जाता है. कोर्ट में आखिरी ऑप्शन के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है. निर्भया केस के आरोपी अपने फांसी की सजा टालने के आखिरी उपाय के तौर पर इसे अपना रहे हैं. वो चाहते हैं कि किसी भी तरह से उनकी फांसी की सजा उम्रकैद में बदल जाए. निर्भया के साथ बेरहमी करने वाले ये गुनहगार अब खुद की मौत का नाम सुनकर थर-थर काँप रहे है। और खुद की जान बचाने के लिए तरह-तरह की सफाई दे रहे है क्यूरेटिव पिटीशन डालने वाले एक दोषी विनय शर्मा की तरफ से कहा गया है कि कोर्ट को विचार करना चाहिए कि घटना के वक्त उसकी उम्र सिर्फ 19 साल की थी. उस अवस्था में उसके सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि पर विचार करके कोर्ट को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. विनय शर्मा ने कहा है कि कोर्ट ने रेप और मर्डर से जुड़े 17 दूसरे मामलों में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला है. इसी तरह से विनय को भी राहत दी जानी चाहिए.


न्याय व्यवस्था में कैसे आया क्यूरेटिव पिटीशन-

क्यूरेटिव पिटीशन (What Is Curative Petition) को न्याय पाने के आखिरी उपाय के तौर पर देखा जाता है, जो देश के हर नागरिक को संविधान के जरिए मिलती है. क्यूरेटिव पिटीशन रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा के एक मामले से सामने आया. इस मामले में कोर्ट के सामने ये सवाल उठा कि क्या सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन खारिज हो जाने के बाद भी कोई उपाय है, जिसके जरिये आरोपी या दोषी व्यक्ति कोर्ट के सामने मामले पर एक बार और विचार करने का आग्रह कर सके. इस पर कोर्ट का कहना था कि न्यायिक व्यवस्था में किसी के साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए. कोर्ट को अगर लगता है कि उसके ही फैसले की वजह से किसी भी तरह का पक्षपात हो रहा है तो वो इसके कुछ बिंदुओं पर दोबारा से विचार कर सकती है. इस तरह से क्यूरेटिव पिटीशन की व्यवस्था सामने आई.

क्यूरेटिव पिटीशन (What Is Curative Petition) रिव्यू पिटीशन के खारिज होने के बाद का आखिरी उपाय है. कोर्ट में आमतौर पर क्यूरेटिव पिटीशन हर मामले में नहीं डाला जाता है. रेयर मामलों में ही कोर्ट क्यूरेटिव पिटीशन को सुनने को राजी होती है. अगर कोर्ट को लगता है कि प्राकृतिक न्याय में किसी भी तरह की अनदेखी हुई है तभी कोर्ट क्यूरेटिव पिटीशन सुनने पर राजी होती है.

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-Mradul tripathi

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