मंगल पांडे : क्रांति की ज्योत जलाने वाले महानायक

0

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई वीर शहीदों में अपने प्राणों की आहुतियां दी थी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे पहले स्वतंत्रता की चिंगारी किसने भड़काई? वे कौन थे जिनके कारण स्वतंत्रता की नीव रखी गई| आज़ादी की बलि वेदी पर चढ़ा स्वतंत्रता संग्राम के पहले महानायक थे ‘मंगल पांडेय’| स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम आहुति मंगल पांडे द्वारा की दी गई थी|

मंगल पांडे ने स्वतन्त्रता की वो अलख जगाई जिसने ब्रिटिश सत्ता को भारत से जड़ से उखाड़ दिया| मंगल पाण्डेय एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1857 में भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई| उत्तरप्रदेश के बलिया जिले के नगवा नामक गांव में 19 जुलाई 1827 को एक साधारण परिवार में जन्मे मंगल पाण्डेय  22 साल की उम्र में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हो गए थे|

देश भर में अंग्रेज शासकों के खिलाफ गुस्से के अलावा मंगल पांडे के विद्रोह की वजह बनी थी ब्रिटिश सेना में इस्तेमाल के लिए चुनी गयी नई एनफील्ड पी-53 राइफल| दरअसल, तब वहां के सैनिकों के बीच यह अफवाह फैल गयी थी कि एनफील्ड पी-53 राइफल के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले नये कारतूस में सूअर और गाय की चर्बी का इस्तेमाल किया जा रहा है| तब इन कारतूस का इस्तेमाल करने से पहले उनका ऊपरी खोल दाँत से खींच कर हटाना होता था| गाय या सूअर की चर्बी से बने कारतूस को दांत लगाकर हटाना होगा यह सोचकर हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों के सिपाही नाराज थे| यही से उनके मन में विद्रोह की चिंगारी सुलग गई|

मंगल पांडे द्वारा लगायी गयी विद्रोह की यह चिंगारी बुझी नहीं, महज एक महीने बाद ही 10 मई सन् 18५६ को  मेरठ की छावनी में बगावत हो गयी| यह बगावत देखते ही देखते पूरे उत्तरी भारत में फैल गई जिससे अंग्रेजों को सन्देश मिलने लगे कि अब भारत पर राज्य करना उतना आसान नहीं है जितना वे समझ रहे थे|

मंगल पाण्डेय ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह किया और उन्होंने अंग्रेज लेफ्टिनेंट बाग पर हमला कर दिया| इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया| ब्रिटिश अदालत ने पहले तो मंगल पाण्डेय को 18 अप्रैल 1857 फांसी देने का फैसला किया लेकिन लेकिन अंग्रेज सिपाहियों के बीच विद्रोह फैलने की आशंका से डर गये और आठ अप्रैल को ही उन्हें फाँसी दे दी| तब उनकी उम्र महज 29 साल थी|

उनके परलोक गमन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ बगावत फूट पड़ी| रानी लक्ष्मीबाई, तांत्या टोपे और वीर कुँअर सिंह जैसे कई स्वतंत्रा सेनानियों ने भारत को आज़ाद कराने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा दी| ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक मंगल पाण्डेय की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन..|

Share.