कहा – सरकार को भेजा था पत्र 

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किंगफ़िशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या को भारत सरकार की तरफ से भगोड़ा घोषित कर दिया गया है। आखिर लंबे समय बाद विजय माल्या ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। माल्या ने एक प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए दावा किया है कि उन्होंने भारत में सरकारी बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने को लेकर साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर अपना पक्ष रखा था, लेकिन उसके लेटर पर पीएम मोदी और वित्तमंत्री में से किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

विजय माल्या ने पत्र में यह भी कहा है कि वह बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने वालों की ‘पहचान’ बन गए हैं और उनका नाम आते ही मानो लोगों का गुस्सा भड़क जाता है। माल्या ने काफी समय बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए यह बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि वह दुर्भाग्य से जिस विवाद में घिरे हुए हैं, उसकी ‘तथ्यात्मक स्थिति’ सामने रखना चाहते हैं।

इसमें माल्या ने कहा है, “राजनेताओं व मीडिया ने मुझ पर इस तरह आरोप लगाए मानो किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए 9 हजार करोड़ रुपए का कर्ज मैंने चुरा लिया और भाग गया। कुछ कर्जदाता बैंकों ने भी मुझे जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाला करार दिया।“ माल्या ने इस मामले में सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से उनके खिलाफ दायर आरोप पत्रों को ‘सरकार व कर्जदाता बैंकों की ओर से आधारहीन और पूरी तरह झूठे आरोपों पर की गई कार्रवाई’ बताया है।

सरकार के सूत्रों का कहना है कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब आखिरी स्टेज पर है| यह सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए किया गया है। सूत्रों की माने तो सीबीआई 31 जुलाई तक लंदन पहुंच जाएगी।

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