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कौन होगा आयोध्या मंदिर का प्रधान पुजारी

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नई दिल्ली: शनिवार को सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court)  ने आयोध्या(Ayodhya)  विवाद का निराकरण करके ऐतिहासिक फैंसला सुनाया है। जिसमे शीर्ष अदालत ने विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने का आदेश दिया है। और केंद को आदेश दिया है की ट्रस्ट बनाकर राम मंदिर का निर्माण कराया जाए। लेकिन अब इस फैंसले के बाद एक नया विवाद खड़ा होते दिख रहा है.  ट्रस्ट में कौन- कौन शामिल होगा और मंदिर का प्रधान पुजारी कौन होगा। इन सब बातों को लेकर बहस छिड़ गई है। इस बीच मंदिर आंदोलन की अगुआ विश्व हिंदू परिषद (VHP) की मांग है. कि ट्रस्ट में न तो सरकार का कोई प्रतिनिधित्व हो और न ही वैष्णव, शैव और सगुण ब्रह्म को मानने वालों के अलावा किसी अन्य को जगह मिले. वीएचपी चाहता है कि पूजा पद्धति को परिवारवाद से बचाने के लिए बद्रीनाथ(Badrinath)  मॉडल अपनाया जाए।

बद्रीनाथ मॉडल-
बद्रीनाथ में ब्रह्मचारी रहने तक ही कोई ब्राह्मण पुजारी पद पर रह सकता है. उसे पूरे समय ब्रह्मचर्य का पालन करना होता मतलब स्त्रियों का स्पर्श भी पाप माना जाता है. बद्रीनाथ की पूजा अर्चना के लिए पुजारी केरल के नंबूदरीपाद ब्राह्मण ही बन सकते हैं. इन्हें शंकराचार्य का वंशज माना जाता है. इन्हें रावल कहते हैं. केरल के नंबूदरीपाद ब्राह्मणों में से रावल का चयन बद्रीनाथ मंदिर समिति ही करती है. इनकी कम से कम योग्यता ये है कि इन्हें वहां के वेद-वेदांग विद्यालय का स्नातक और कम से कम शास्त्री की उपाधि होने के साथ ब्रह्मचारी भी होना चाहिए.


विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा की ट्रस्ट बनाने को लेकर अभी तक हमारी सरकार से कोई बात नहीं हुई है. लेकिन हमारा मानना है की ट्रस्ट में मंत्रियों या अफसरों को नहीं होना चाहिय्रे क्योकि हम नहीं चाहते कि मंदिर निर्माण की निरंतरता में अधिकारियों के तबादले या मंत्रियों के पद से हटने से बाधा आए.राममंदिर निर्माण को लेकर आयोध्या में तैयारियां बहुत पहले से चल रही है.बस लोगों को इंतज़ार था तो केवल कोर्ट के इंतज़ार का गौरतलब है की मंदिर बनाने के लिए उपयोग होने वाले पत्थरों को तराशने का काम भी आधे से अधिक हो चुका है।

-Mradul tripathi

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